प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष और विधायक रामलाल ठाकुर ने जयराम सरकार के जनमंच कार्यक्रम को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने तंज कसा, जनमंच कार्यक्रम प्रधानमंत्री के मन की बात की तरह एक तरफा कार्यक्रम बन गया है।
इसमें सरकार के मंत्री सिर्फ अपनी बात सुना रहे हैं, जबकि लोगों की समस्याएं जस की तस पड़ी हैं। बजट की कमी से जूझ रहे विभागों के लिए लोगों को राहत देना मुश्किल हो गया है। रामलाल ठाकुर ने जनमंच कार्यक्रम की परिभाषा और कार्य क्षेत्र को लेकर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है।
वीरवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन शिमला में प्रेस वार्ता में रामलाल ठाकुर ने कहा कि जनमंच में ऐसे मामलों की सुनवाई भी हो रही है, जिन्हें हल करने का सरकार के पास अधिकार तक नहीं है।
कानूनी मामलों, राजस्व से जुड़े जमीन विवाद, फॉरेस्ट क्लीयरेंस के मामलों सहित नेशनल हाइवे, फोरलेन आदि को लेकर भी मंत्री आदेश दे रहे हैं। लोगों द्वारा उठाई गई समस्याओं को जिला उपायुक्तों को भेजा जा रहा है।
मामले हल होने की जगह उपायुक्त कार्यालयों में लंबित हो रहे हैं। जनमंच से पहले अधिकारी संबंधित क्षेत्रों में जाकर लोगों की समस्याओं और मांगों की सूची बना रहे हैं। इसके बाद जनमंच करने पर लाखों खर्च हो रहे हैं। कार्यक्रम के बाद अधिकारी दोबारा मौकों पर जाकर समस्याओं को जांच रहे हैं।
इस पूरी प्रक्रिया में 15 दिन से अधिक का समय लग रहा है। इस कारण दफ्तरों में अपने काम से आ रहे लोग निराश लौटने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में सरकार दखल नहीं दे सकती, उनको लेकर जनमंच में झूठी बातें नहीं करनी चाहिए।