वहीं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने स्थानीय निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, चेयरमैन और वाइस चेयरमैन के चुनावों से संबंधित नियमों में किए गए संशोधनों को लेकर कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने और निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रभावित करने के उद्देश्य से चुनाव प्रक्रिया के बीच में ही नियम बदल रही है। डॉ. बिंदल ने कहा कि प्रदेश में नगर निगम, नगर परिषद, जिला परिषद और पंचायत चुनावों में विजयी होकर आए प्रतिनिधियों को अपने पक्ष में करने के लिए कांग्रेस सरकार, उसके मंत्री और संगठन के नेता हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए गैरकानूनी और अलोकतांत्रिक तरीके अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संविधान और लोकतांत्रिक परंपराओं के अनुसार एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद उससे जुड़े नियमों में बदलाव नहीं किया जाता। इसके बावजूद सरकार ने चुनाव से संबंधित नियमों में संशोधन कर दिया है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
अध्यक्ष ने बताया कि नगर परिषदों में पहले से निर्धारित नियमों के अनुसार नतीजे आने के 24 से 48 घंटे के भीतर नोटिफिकेशन जारी कर प्रक्रिया शुरू होती थी। इसके बाद सात दिनों के भीतर निर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाई जाती थी। शपथ ग्रहण के एक घंटे के भीतर अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के चुनाव का नोटिस जारी करने का प्रावधान था। पहली बैठक में तीन-चौथाई सदस्यों की उपस्थिति आवश्यक होती थी। यदि कोरम पूरा नहीं होता तो बैठक स्थगित कर तीन दिनों के भीतर दोबारा बैठक बुलाई जाती थी, जिसमें कोरम की बाध्यता नहीं रहती थी और चुनाव संपन्न कराए जाते थे। लेकिन, सरकार ने संशोधन करते हुए यह प्रावधान कर दिया है कि उपायुक्त अथवा उनका प्रतिनिधि अपनी सुविधा के अनुसार शपथ ग्रहण और चुनाव की तिथि तय करेगा।