भाजपा विधायक दल और अन्य नेताओं ने प्रदेश सरकार के खिलाफ राज्यपाल को ज्ञापन दिया है। इसमें कांग्रेस सरकार पर बदला-बदली की भावना से काम करने का आरोप लगाया गया है। पूर्व भाजपा सरकार की ओर से विभिन्न विभागों में खोले गए सरकारी संस्थानों, कार्यालयों को बंद करने के निर्णय को असांविधानिक करार दिया है। सरकार को चेतावनी दी गई कि इन निर्णयों को वापस नहीं लिया तो पूरे प्रदेश में भाजपा जनांदोलन खड़ा करेगी। वहीं, भाजपा विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मीडिया से बातचीत में कहा कि विपक्ष सरकारी संस्थानों को बंद कराने के मामले का कानूनी रूप से परीक्षण करा रहा है।
अगर जरूरी हुआ तो विपक्ष सुक्खू सरकार के खिलाफ कानूनी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा। प्रदेश में मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद ही ही नए संस्थान और कार्यालय खोले गए थे। जिन मामलों की कैबिनेट से मंजूरी मिलती है, उनके लिए बाद में बजट का प्रावधान भी कर लिया जाता है। जयराम ने कहा कि सुक्खू सरकार ने हिमाचल प्रदेश बंद एक्सप्रेस शुरू की है। अभी तक मंत्रिमंडल का गठन भी नहीं किया गया है। ऐसा लगता है कि सबकुछ बंद है। मंत्रिमंडल को भी बंद किया गया है।
कभी नहीं बनी ऐसी स्थिति
जयराम ने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले कहा था कि दस दिन के भीतर ओपीएस और दस गारंटियों को लागू किया जाएगा। सरकार बने हुए 14 दिन हो गए हैं, मगर ऐसी स्थिति आज से पहले कभी नहीं बनी। एसडीएम कार्यालयों ने चुनाव भी करवा दिए। अब इन्हें बंद किया जा रहा है, जबकि एसडीएम कार्यालय को न्यायिक शक्तियां देने के लिए हाईकोर्ट की कमेटी की सिफारिश पर ही खोला जाता है। अभी विधायकों की शपथ भी नहीं हुई है और वे मंत्रिमंडल के फैसलों को खारिज करने की संस्तुति कर रहे हैं।
ज्ञापन में दिए ये तथ्य
प्रदेश में अब तक राज्य विद्युत के 32, स्वास्थ्य संस्थान पीएचसी, सीएचसी, अस्पताल 291, तहसीलें 3, उप तहसीलें 20, कानूनगो सर्किल 9, पटवार सर्किल 80, आईटीआई 17, रेवेन्यू सब डिवीजन सर्किल, डिवीजन, सब डिवीजन, सेक्शन 16, 2, लोक निर्माण विभाग एसडीपीओ, पुलिस स्टेशन, पुलिस पोस्ट 18, आयुर्वेदिक अस्पताल 3, आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केेंद्र 41, अन्य 42 सहित 574 कार्यालयों को बंद कर दिया गया है।
ज्ञापन में कहा गया है कि यह न केवल जनविरोधी है, बल्कि तानाशाही निर्णय हैं, जिन्हें कदापि सहन नहीं किया जा सकता। सुक्खू ने बिना कैबिनेट बैठक के विभिन्न सरकारी संस्थानों को बंद करने के आदेश पारित किए हैं।