हाल ही में हुए ग्राम पंचायत चुनावों से राजनीति में आने वाले युवा प्रतिनिधि गांवों में विकास के नए कीर्तिमान गढ़ने की तैयारी कर रहे हैं। एक तरफ ये विकास की गाड़ी को सही दिशा में दौड़ाने की बात कर रहे हैं तो दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों की बख्शो देवी जैसी प्रतिभाओं को सही प्लेटफार्म मुहैया कराने की भी तैयारी कर रहे हैं। हालांकि विकास करने की बात करने वाले इन युवाओं के
मन में पिछले सालों में विकास के नाम पर हुए धोखे की टीस भी दिखती है। यही कारण है कि ज्यादातर युवा ऐसे हैं जिन्होंने अपने गांवों की स्थिति सुधारने के लिए नौकरी करने के बजाय राजनीति की राह पकड़ना जरूरी समझा। बुधवार को होटल पीटरहॉफ में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे कुछ युवाओं से ‘अमर उजाला’ ने बात कर उनके मन की बात जानने की कोशिश की।
प्रदेश के सुदूर इलाके लाहौल-स्पीति की ताबो ग्राम पंचायत से उपप्रधान चुनी गईं 23 साल की पद्मा केसंग प्राइवेट यूनिवर्सिटी से स्नातक कर रही हैं। केसंग कहती हैं कि पढ़ाई जारी रखूंगी लेकिन सिस्टम की अनदेखी की वजह से गांवों में दम तोड़ रही बख्शो देवी जैसी प्रतिभाओं को आगे लाने के लिए हर संभव प्रयास करना प्राथमिकता रहेगी।
महज 22 साल की उम्र में सिलिंग तहसील के काजा ग्राम सभा की प्रधान बनने वाली यमचुक पॉल्डन कहती हैं कि आजादी के इतने साल बाद आज भी ग्रामीण अंचलों का स्तर औसत से नीचे है। कोशिश रहेगी कि अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान गांव को जरूरी आधारभूत चीजें मुहैया कराऊं।
24 वर्षीय प्रधान आत्मा राम हैं बीएड पास
धार चांदना पंचायत के 24 वर्षीय प्रधान आत्मा राम बीएड पास हैं। अनुसूचित जाति से संबंध रखने वाले आत्मा कहते हैं कि आज भी समाज में एससी अलग-थलग हैं। ऐसे में कोशिश रहेगी कि समाज के पिछड़े लोगों को विकास के साथ जोड़कर आगे बढ़ना प्राथमिकता रहेगी। बोले, समाज के समग्र विकास से ही देश और प्रदेश का विकास संभव है।
सिरमौर जिले की ग्राम पंचायत श्री क्यारी के प्रधान लायक राम कहते हैं कि गांवों में आज भी पीने के पानी और शहरों को जोड़ती सड़कों का अभाव है। शहर विकसित हो रहे हैं लेकिन गांव पगडंडियों तक सीमित हैं। इसी अंतर को खत्म करने के लिए गांव का विकास करना प्राथमिकता रहेगी।
'गावों को भी शहरों की तरह बनाऊंगा'
चौपाल तहसील के पौलिया ग्राम से पहली बार चुनकर आए 24 साल के अक्षय बताते हैं कि आजादी के इतने साल बाद भी गांव गरीबों के लिए आसरा बनकर रह गए हैं। जो सक्षम हो जाते हैं, वे शहरों की ओर रुख कर लेते हैं। कोशिश रहेगी कि गांवों को भी ऐसा बनाया जाए कि शहर की बजाय लोग अपने गांव, अपनी जमीन से जुड़े रहने पर गर्व महसूस करें।
जुब्बल ब्लॉक के निकराड़ी से प्रधान स्वाति चौहान एमए बीएड हैं। कहती हैं कि पहले सरकारी नौकरी करने की सोचती थी लेकिन फिर महसूस हुआ कि नौकरी करके अपना तो भला कर सकेंगे लेकिन गांव के हालात जस के तस रहेंगे। पिछले प्रतिनिधियों ने गांव को विकास की राह पर नहीं जाने दिया। इसीलिए राजनीति की राह थामी।