इस साल कर्ज लेने के कैलेंडर के हिसाब से मई महीने में भी ऋण लेना प्रस्तावित था। पर आर्थिक प्रबंधन ठीक से हो पाने की वजह से मई महीने में यह कर्ज लेने की नौबत नहीं आई है, जबकि राज्य वित्त विभाग ने अब तक इसकी अधिसूचना जारी कर देनी थी।
हिमाचल सरकार को इस वित्तीय वर्ष के अप्रैल और मई महीनों में अभी कर्ज लेने की नौबत नहीं आई है। इस वित्तीय वर्ष में इस माह 1000 करोड़ रुपये का कर्ज लेना प्रस्तावित था, मगर इसे आगे टाल दिया गया है। इसका कारण अप्रैल महीने तक की राजस्व प्राप्तियों में काफी सुधार का होना है। मई महीने में अप्रैल माह की राजस्व प्राप्तियों का यह प्रभाव है। हालांकि कोरोना कर्फ्यू के लगने के बाद इस महीने का प्रभाव अगले माह नजर आएगा। हो सकता है कि अगले महीने ऋण लेना पड़े।
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बेशक प्रदेश की माली हालत पतली चल रही है। इस साल कर्ज लेने के कैलेंडर के हिसाब से मई महीने में भी ऋण लेना प्रस्तावित था। पर आर्थिक प्रबंधन ठीक से हो पाने की वजह से मई महीने में यह कर्ज लेने की नौबत नहीं आई है, जबकि राज्य वित्त विभाग ने अब तक इसकी अधिसूचना जारी कर देनी थी। कोविड संकट के बीच हिमाचल सरकार को केंद्र से मिल रही आर्थिक मदद, जीएसटी संग्रहण, पिछले महीनों में हुई अपनी अच्छी राजस्व प्राप्तियां और कई तरह के अनावश्यक खर्चों को घटा देना इसका कारण माना जा रहा है।
हालांकि, अब यह देखना होगा कि क्या जून महीने में भी सरकार कर्ज लेना टाल पाएगी। चूंकि इस महीने कोरोना कर्फ्यू के बीच भी कोविड मरीजों की मृत्यु बढ़ जाने, यहां कई तरह की स्वास्थ्य सुविधाओं को जोड़े जाने के बाद इस तरह की नौबत आ सकती है। वहीं, अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त प्रबोध सक्सेना ने बताया है कि फिलहाल नया कर्ज नहीं लिया जा रहा है।