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लॉकडाउन यूं ही रहा तो हिमाचल में बुरी तरह धड़ाम होगी आर्थिक विकास दर

Sun, 12 Apr 2020 09:45 AM IST
Krishan Singh सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना वायरस से लड़ने के लिए लॉकडाउन को जारी रखने के अलावा हिमाचल के पास कोई चारा नहीं है। ऐसे में चिंतनीय यह है कि लॉकडाउन यूं ही रहा तो हिमाचल की अर्थव्यवस्था पटरी से बाहर हो जाएगी। अगले कई महीनों तक हालात नहीं सुधरे तो राज्य की विकास दर में भारी गिरावट हो सकती है। राज्य में पिछले वित्तीय वर्ष में भी विकास दर गिरी थी। आर्थिक मंदी से यह 6.8 से गिरकर 5.3 हो गई थी। वर्तमान में राष्ट्रीय विकास दर 5.0 है। हिमाचल राजस्व घाटे वाला राज्य है। यही हालात रहे तो मुश्किलें बढ़ेंगी।

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प्रदेश में आबकारी एवं कराधान विभाग समेत तमाम विभाग राजस्व प्राप्तियां पर्याप्त नहीं कर पा रहे हैं। उद्योग, विनिर्माण समेत कई क्षेत्रों में कामकाज ठप है। सरकार का एक लाख करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू हस्ताक्षरित करने का महा अभियान भी धरातल पर नहीं उतर पा रहा है। स्थितियां सामान्य हुईं तो भी इसे जमीन पर उतारना कठिन काम होगा। हाइड्रो सेक्टर की रफ्तार भी थम गई है। सेवा क्षेत्र में कर्मचारियों की सेवाएं नहीं ली जा पा रही हैं। पर्यटन ढांचा तो पूरा ही चरमरा गया है। अगर पिछले वर्ष सेब की अच्छी फसल नहीं होती और सेब का लगभग 4500 करोड़ रुपये का कारोबार नहीं होता तो उस स्थिति में विकास दर 5.3 से भी नीचे गिर सकती थी।

इस बार अगर लॉकडाउन लंबा खिंचता है और सेब की फसल की खरीद के लिए पिछले साल की तरह व्यापारी नहीं पहुंच पाते हैं तो बहुत गड़बड़ी हो जाएगी। ऐसे में विकास दर गिरकर 2 से 3 फ़ीसदी तक गिर सकती है। प्रतिव्यक्ति आमदनी में भी भारी गिरावट हो सकती है। इस स्थिति को देखते हुए हिमाचल प्रदेश के आर्थिक विशेषज्ञ परेशान हैं। उल्लेखनीय है कि हिमाचल पहले से ही करीब 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज के तले दबा हुआ है। राज्य के पास आमदनी का कोई कारगर स्त्रोत नहीं है। इस बार केंद्र से अच्छा-खासा राजस्व घाटा अनुदान नहीं मिला होता तो उस स्थिति में हिमाचल के हालात और भी खराब हो सकते थे। लॉकडाउन की स्थिति में पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमरा सकती है। प्रदेश केंद्र की बैसाखी पर ही आश्रित होगा। 

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हालात सामान्य न हुए तो बढ़ सकती हैं मुश्किलें 

वाहनों को सैनिटाइज करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
अर्थशास्त्री और हिमाचल के पूर्व आर्थिक सलाहकार प्रदीप चौहान बताते हैं कि अभी जल्दबाजी में कुछ कहना तो सही नहीं होगा। इसका आकलन मई महीने के बाद हो सकता है। यह सही है कि अगर हालात सामान्य नहीं हुए तो मुश्किलें बढ़ जाएंगी। 

स्थिति सामान्य होगी तो अर्थव्यवस्था पटरी पर होगी : डॉ. बाल्दी 
वीरभद्र, धूमल और जयराम तीनों की ही सरकारों में वित्त सचिव रहे सेवानिवृत्त मुख्य सचिव डॉ. श्रीकांत बाल्दी हालांकि आशावादी बने हुए हैं। उन्होंने कहा कि यह देशव्यापी स्थिति है। इसमें जो देश के साथ होगा, वही हिमाचल के साथ भी होगा। केंद्र सरकार से हिमाचल को अच्छा सहयोग मिल रहा है। जब सारी स्थितियां ठीकठाक होंगी तो अर्थव्यवस्था फिर से पटरी पर आ जाएगी। सारी चीजें पहले जैसी ही हो जाएंगी। 

आर्थिक विकास दर गिरेगी, इस बारे में भी सोचना होगा 
विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि हिमाचल आर्थिक मंदी की चपेट में आ रहा है। सरकार चेरी, हरे बादाम आदि की बिक्री की लॉकडाउन के बीच व्यवस्था नहीं कर पा रही है। यही हालात अगले सेब सीजन में हो सकते हैं। आर्थिक विकास दर गिर जाएगी। यह गिरकर दो से तीन प्रतिशत तक आ सकती है। इस महामारी से निपटारे के बीच सरकार को इस बारे में भी सोचना होगा।
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