पीस मील वर्करों ने आरोप लगाया कि उन्हें न तो उचित वेतन और न ही साप्ताहिक अवकाश दिया जा रहा है।
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एचआरटीसी में कार्यरत पीसमील वर्करों को अनुबंध पर न लिए जाने के मामले में यूनियन ने मंगलवार को विधानसभा का घेराव कर निगम प्रबंधन और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। पीस मील वर्करों ने आरोप लगाया कि उन्हें न तो उचित वेतन और न ही साप्ताहिक अवकाश दिया जा रहा है। परिवहन प्रबंधन को मांग संबंधित ज्ञापन सौंपने के बाद भी उन्हें बैठक के लिए नहीं बुलाया गया।
तकनीकी कर्मचारी संगठन के प्रदेशाध्यक्ष रोशन चौहान ने कहा कि बसों को तकनीकी रूप से ठीक करने का कार्य पीसमील कर्मचारियों पर रहता है। पीसमील वर्करों दिन रात एक करके बसों को ठीक करते हैं लेकिन उन्हें न तो उचित वेतन दिया जा रहा और न ही उन्हें अन्य कर्मचारियों को दी जाने वाली सुविधा प्रदान की जा रही है।
प्रदेश भर में निगम में कार्यरत पीस मील कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर निगम प्रबंधन और प्रदेश सरकार से लगातार आग्रह कर रहे हैं। लेकिन उनकी मांगों को अनसुना किया जा रहा है। पीसमील वर्करों का आरोप है कि पीस मील कर्मचारियों ने मार्च माह में निगम प्रबंधन और प्रदेश सरकार को अपना मांग सौंपा था। लेकिन उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई।
मजबूर होकर उन्हें विधानसभा का घेराव करना पड़ा। उधर जेसीसी के अध्यक्ष पवन गुलेरिया ने कहा कि परिवहन निगम में 80 फीसदी कार्य पीस मील वर्कर करते हैं। निगम में 1100 पीस मील वर्कर लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। प्रबंधन की ओर से उन्हें अनुबंध पर लिए जाने का आश्वासन दिया था लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
परिवहन मंत्री से मिला आश्वासन
धरना प्रदर्शन के बाद पीस मील वर्करों का प्रतिनिधि मंडल जेसीसी अध्यक्ष पवन गुलेरिया की अध्यक्षता में परिवहन मंत्री जीएस बाली से मिला। उन्होंने प्रतिनिधि मंडल को एक महीने के भीतर मांगे पूरा करने का आश्वासन दिया।