बर्फ से लकदक रहने वाले इलाकों की बागवानी का राजा सेब अब लू के थपेड़ों में भी पनप सकेगा। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले के किसान हरिमन शर्मा की हैरतअंगेज करने वाली खोज से तैयार हुई सेब की खास वैरायटी विशेष तौर पर गरम इलाकों के मुफीद है। किसान हरिमन के नाम से तैयार हरिमन-99 सेब की वैरायटी का ट्रायल जम्मू-कश्मीर के निचले मैदानी इलाकों में भी शुरू हो गया है।
पहले चरण में कुल 1200 पौधे लगाए गए हैं। अन्य राज्यों की तर्ज पर यदि जम्मू कश्मीर के निचले इलाकों में भी नतीजे अच्छे रहते हैं, तो इससे सेब की खेती से जुड़े कई मिथक टूट सकते हैं। हरिमन शर्मा द्वारा तैयार सेब की वैरायटी का ट्रायल जम्मू-कश्मीर में शुरू करवाने वाले डा. केसी शर्मा ने बताया कि जम्मू संभाग के विभिन्न बड़े संस्थानों से लेकर महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों के परिसरों में हरिमन-99 वैरायटी के पौधे रोपे गए हैं।
सांबा जिले के राया इलाके के नजदीक स्थित मधु परमहंस रांजड़ी आश्रम में 800 पौधे रोपे गए हैं। देश के कई अन्य राज्यों में 47 डिग्री तापमान की गरमी में भी हरिमन-99 ने शानदार नतीजे दिए हैं। लिहाजा जम्मू कश्मीर का ट्रायल भी निश्चित रूप से सफल रहेगा। वैरायटी तैयार करने वाले किसान हरिमन शर्मा ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1999 में यह वैरायटी विकसित की थी।
तमाम तरह के परीक्षण पूरे होने के बाद वर्ष 2006 में गरम जलवायु वाले इलाकों में ट्रायल शुरू किया गया था। कर्नाटक, पंजाब और हरियाणा में उनके ट्रायल सफल रहे, जिसके बाद साइंस एंड टेक्नोलाजी विभाग की नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन ने उन्हें सहयोग देना शुरू कर दिया है। वर्तमान में जम्मू कश्मीर सहित देश के तमाम 29 राज्यों में कुल 2.25 लाख पौधों का ट्रायल चल रहा है।
कश्मीर के गोल्डन डिलिशियस का रूट स्टॉक करते इस्तेमाल- हरिमन शर्मा के अनुसार हरिमन-99 वैरायटी तीसरे वर्ष से फल देने लगती है, लेकिन प्रति पेड़ एक क्विंटल तक की पैदावार हासिल करने के लिए दस वर्ष का समय लगता है। एक फल का वजन 250 से 300 ग्राम तक होता है।
गुणवत्ता जांच की कसौटी पर भी सेब खरा उतरा है। हरिमन के अनुसार वर्तमान में वह नए पौधे तैयार करने के लिए कश्मीर के गोल्डन डिलिशियस का रूट स्टाक लेते हैं। हिमाचल में कलम कर हरिमन-99 वैरायटी तैयार की जाती है। वैरायटी को जर्मनी से भी शानदार रिस्पांस मिला है। खास बात है कि सेब की फसल जून महीने में तैयार होती है।
बागवानी निदेशक अनिल कुमार शर्मा ने बताया कि समर जोन एपल प्लांटेशन का ट्रायल निजी स्तर पर चल रहा है। ट्रायल के नतीजे आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। जम्मू कश्मीर में गोल्डन डिलिशियस सहित अर्ली, मिड और लेट श्रेणी की लगभग 20 वैरायटी के सेब की खेती होती है। यह सभी वैरायटी बर्फबारी वाले इलाके में ही होती हैं।