पीएचडी में प्रवेश परीक्षा के आधार पर प्रवेश की प्रक्रिया में छात्रों की 80 अंक की प्रवेश परीक्षा होगी। इसमें प्राप्तांक के आधार पर अधिकतम 10 फीसदी जेआरएफ /नेट का वेटेज मिलेगा, जो प्राप्तांक का दस फीसदी तक रहेगा। यानी आठ अंक रहेंगे, वहीं एमफिल/सेट के अधिकतम चार अंक मिलेंगे। इन दोनों में से अधिकतम आठ अंक ही दिए जाएंगे। शेष बचे 12 अंक का रिसर्च एप्टीट्यूड टेस्ट रहेगा। इसमें छात्र को अधिकतम 12 अंक मिल सकेंगे।
यूजीसी के इस नियम को लागू करते हुए रिसर्च एप्टीट्यूड टेस्ट में किसी तरह का पक्षपात न हो, कोई सवाल न उठे, इसके लिए हर विभाग में पीएचडी में प्रवेश की प्रक्रिया के तहत रिसर्च एप्टीट्यूड टेस्ट इंटरव्यू के लिए विभागाध्यक्ष की अध्यक्षता में कमेटी बनेगी। इसमें विभाग के वरिष्ठ प्रोफेसर शामिल होंगे। जहां वरिष्ठ प्रोफेसर नहीं होंगे, वहां डीन कमेटी का सदस्य होगा। इससे कमेटी की जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
यूजीसी के नियम पर होगा रिसर्च एप्टीट्यूड टेस्ट
जल्द पीएचडी के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसके लिए हर विभाग से उपलब्ध सीटों का ब्योरा आ चुका है। इसे विज्ञापित कर आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। इस बार पीएचडी की प्रवेश प्रक्रिया में रिसर्च एप्टीट्यूड टेस्ट (इंटरव्यू ) होगा।- प्रो. बीके शिवराम, अधिष्ठाता अध्ययन, एचपीयू
साल में दो बार मिलता है पीएचडी में प्रवेश
हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में एक सत्र में दो बार पीएचडी की खाली सीटों पर प्रवेश दिया जाता है। जुलाई में जेआरएफ और राष्ट्रीय स्तर की फेलोशिप की परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों को सीधे प्रवेश दिया जाता है, जबकि दिसंबर में प्रवेश परीक्षा के आधार पर प्रवेश दिया जाता है। कोरोना के कारण गड़बड़ाई प्रवेश की प्रक्रिया के चलते दिसंबर की प्रवेश परीक्षा को इस बार मार्च में आयोजित किया जा रहा है।