अब मेयर और अध्यक्षों की मंजूरी के बगैर विकास कार्यों का पैसा नहीं निकलेगा। चेक पर इनके हस्ताक्षर होंगे।
प्रदेश सरकार नगर निगम मेयर और शहरी निकायों के अध्यक्षों की शक्तियां बढ़ाने जा रही है। मेयर और अध्यक्षों की मंजूरी के बगैर विकास कार्यों का पैसा नहीं निकलेगा। चेक पर इनके हस्ताक्षर होंगे। सरकार ने तीन साल पहले इन नुमाइंदों से चेक साइन करने की शक्तियां छीनकर इन्हें कमिश्नर और निकायों के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (ईओ) को दे दिया था।
अब इसे बहाल किया जा रहा है। प्रदेश में शिमला और धर्मशाला दो नगर निगम हैं, जबकि करीब 50 शहरी निकाय हैं। नगर निगम और निकायों में कोई सामान खरीदना है या फिर विकास कार्यों को लेकर ठेकेदारों की पेमेंट करनी है, इसके लिए चेक पर पहले नगर निगम आयुक्त एवं निकायों में एग्जीक्यूटिव ऑफिसर के हस्ताक्षर होते थे।
पेमेंट रिलीज कराने के लिए दोनों के चेक पर साइन होना अनिवार्य था। किसी एक के चेक पर साइन न होने पर पेमेंट रिलीज नहीं होती थी। जनता के नुमाइंदों से ये शक्तियां छीनने पर विरोध हुआ, लेकिन सरकार ने उन्हें यह शक्तियां नहीं दीं। नगर निगम धर्मशाला चुनाव और शहरी निकायों में चुनाव के बाद अब सरकार ने इन नुमाइंदों को यह शक्तियां देने का फैसला लिया है।
'नगर निगम के मेयर और निकायों के अध्यक्षों को चेक पर साइन करने की शक्तियां दी जा रही हैं। विभागीय स्तर पर इस पर कार्य चल रहा है।'- सुधीर शर्मा, शहरी विकास मंत्री