आप सेब के पुराने बगीचे को काटकर सेब की नई प्रजातियों को लगाने की सोच रहे हैं तो देर किस बात की बात, उद्यान विभाग आपकी मदद को तैयार है। नई प्रजातियों के साथ नया बगीचा लगाने में आपकी मदद करेगा और अनुदान भी देगा। बस आपको कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी। मौजूदा समय में 1082 बागवान अपने पुराना बगीचा उखाड़कर नया बगीचा लगा चुके हैं।
महकमे की ओर से इन्हें करीब साढ़े चार करोड़ से अधिक निर्धारित अनुदान भी जारी कर दिया है। ऊपरी शिमला में सबसे अधिक सेब के बगीचे हैं। इनमें कोटगढ़ , कोटखाई, ठियोग और रोहडू़ के इलाकों में काफी पुराने बगीचे हैं। साल भर मेहनत के बावजूद इनसे उम्मीद के मुताबिक बागवानों को फसल नहीं मिल पाती। जलवायु में बदलाव से बागवानों को सेब के पौधों की पुरानी प्रजाति से बेहतर किस्म का सेब तैयार करना कठिन हो गया है।
बेहतर किस्म का सेब तैयार करने के लिए बागवान सेब की स्पर प्रजाति के पौधों की प्रणाली को अपना रहे हैं। यह केवल 3 साल में सैंपल दे देता है और रॉयल सेब के मुकाबले स्पर प्रजाति का पौधा बेहतर किस्म के फल और पैदावार भी देता है।
अनुदान पाने को ये हैं औपचारिकताएं
बागवान अपने निकट बागवानी केंद्र से अनुदान का फार्म लें। फिर जिस जगह पर बागवान ने पुराने पौधे को उखाड़कर नए पौधे लगाने हैं उस जगह का ततीमा, जमाबंदी पौधों के खरीद के बिल, गड्ढों के बिल और बागवान की नए पौधों के साथ फोटो लेकर और इन्हें बागवानी केंद्र में जमा करवा दें। इसके बाद सबि्सडी की राशि जारी की जाएगी।
पैंतालीस हजार तक अनुदान देगा विभाग
पुराने पौधों को उखाड़कर नए प्रजाति के बगीचे लगाने के लिए विभाग 1 बीघा जमीन पर 3600 रुपये का अनुदान देता है। ऊपरी शिमला के रोहडू , रामपूर, कोटखाई, जुब्बल, ठियोग, कुमारसेन, कोटगढ़, किन्नौर के पुराने बगीचे वाले बागवान इस अनुदान की सुविधा ले सकते हैं। विभाग औसतन 45 हजार तक का अनुदान ही देगा।
पहले आओ पहले पाओ पर अनुदान
उद्यान विभाग के उपनिदेशक अशोक कुमार मिश्रा ने बताया कि पुराने बगीचे को उखाड़कर नए किस्मों के पौधोें को लगाने के लिए विभाग 45 हजार तक का अनुदान देगा। अगर बागवान विभाग से सेब की नई किस्मों के पौधे लेना चाहे तो विभाग उन्हें हर तरह के पौधे उपलब्ध करवाएगा। उन्होंने बागवानों से आग्रह किया कि इस अनुदान का लाभ लें। पहले आओ पहले पाओ के आधार पर इसे जारी किया जाएगा।