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सीएम बोले, प्रदेश में नए शहर बनाने की संभावनाएं तलाशेंगे

Wed, 06 Apr 2016 10:07 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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अब सरकार नए शहरों को बसाने और पुराने शहरों के बोझ को कम करने पर विचार कर रही है।
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प्रदेश के पुराने शहरों के आकार को बढ़ाने पर सरकार ने इंकार कर दिया है। सरकार का मानना है कि पुराने शहर आज ऐसे हालात तक पहुंच गए हैं कि न तो उन्हें फैलाया जा सकता है और न ही ज्यादा बदलाव की संभावना है। ऐसे में अब सरकार नए शहरों को बसाने और पुराने शहरों के बोझ को कम करने पर विचार कर रही है।
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मंगलवार को भाजपा विधायक सुरेश भारद्वाज ने प्रदेश में खासकर शिमला की ट्रैफिक प्रणाली पर सदन में विचार का प्रस्ताव रखा था। चर्चा के दौरान विधायकों ने प्रदेश के विभिन्न शहरों की समस्या को सामने रखा जिसपर सीएम वीरभद्र सिंह ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि पूरे प्रदेश के लिए प्लानिंग करने के बजाय हर जिले या शहर में डीसी, स्थानीय विधायकों और सांसद व विभिन्न विभागों के अधिकारियों की कमेटी बनाकर वहां के लिए प्लान तैयार किया जाएगा।

सीएम ने कहा कि शहरों में बढ़ती ट्रैफिक की समस्या में उतना ही गंभीर आम लोगों को होना पड़ेगा जितना कि सरकार और विभाग हैं। आज पूरा शिमला डंगे पर टिका हुआ है, ऐसे में इसके विस्तार के बारे में सोचा ही नहीं जा सकता। हां, ट्रैफिक को रेगुलराइज करने पर काम किया जाएगा लेकिन इसमें आम लोगों के सहयोग की भी जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि शिमला के साथ साथ विभिन्न शहरों में मल्टीलेवल पार्किंग बनाने का काम किया जा रहा है।
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बताया कि एक समय जब शिमला बसाया गया तब एक दो वाहन ही चलते थे लेकिन आज शिमला में 20 हजार वाहन दौड़ते हैं। कहा कि पुराने शहरों की क्षमता से अधिक बोझ के बाद अब दो पुराने शहरों के बीच के छोटे शहरों में रिजॉर्ट या टूरिस्ट स्पॉट बनाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले ट्रैफिक पुलिस का गठन कुछ समय पहले किया गया है। अब उन्हें आधुनिक ट्रेनिंग से युक्त कर दक्ष बनाने का प्रयास किया जाएगा।

पेट्रोल से ज्यादा पार्किंग पर आ रहा खर्च

इससे पहले विधायक सुरेश भारद्वाज ने प्रस्ताव रखते हुए कहा कि आज शिमला में पेट्रोल से ज्यादा वाहन खड़ा करने पर खर्च हो रहा है। - फोटो : अमर उजाला
इससे पहले विधायक सुरेश भारद्वाज ने प्रस्ताव रखते हुए कहा कि आज शिमला में पेट्रोल से ज्यादा वाहन खड़ा करने पर खर्च हो रहा है। ऐसे में ट्रैफिक की परेशानी को दुरुस्त करने के लिए डीटेल प्लान बनाया जाए। सोमवार को सदन में पेश हुए प्रतिबंधित सड़क के प्रस्ताव को वापस लेने पर भी सवाल उठाए। कहा कि अधिकारी ऐसी गलती करते जिसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है।

कोर्ट के हर मामले में दखल देने पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। कहा, जहां संवैधानिक संकट हो वहां कोर्ट का बोलना उचित है लेकिन प्रदेश का प्रबंधन इस सदन के सदस्यों और सरकार के बीच चर्चा के बाद तय होना चाहिए। इस दौरान उन्होंने विभिन्न सुझाव भी दिए।

रेलवे के साथ मिलकर जल्द शुरू हो पार्किंग का काम
विधायक महेश्वर सिंह ने कहा कि पुराने बस स्टैंड के पास रेलवे की काफी संपत्ति है जिसका वह इस्तेमाल नहीं कर रही। सरकार ने प्रयास किया लेकिन वह सार्थक प्रयास करे तो बाहर से आने वालों के लिए पार्किंग का एक बड़ा स्थल वहां तैयान किया जा सकता है। इससे पहले उन्होंने कहा कि आज शहरों के  साथ साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी ट्रैफिक की स्थिति को सुधारने की जरूरत है।

लक्ष्य बनाकर काम करे तो दिक्कत हो सकती है दूर
नाहन से विधायक डा राजीव बिंदल ने कहा कि सरकार अपने बाईपासों के आसपास के अतिक्रमण को रोकने के लिए पुलिस, पीडब्ल्यूडी और राजस्व विभाग की संयुक्त टीमें बनाकर हटाने की कार्रवाई करे। इसके अलावा उन्होंने कहा कि लक्ष्य बनाकर सरकार काम करेगी तो दिक्कतों से निजात पाना असंभव नहीं।

सुझाव दिया कि हर सड़क पर लोडिंग-अनलोडिंग के प्वाइंट चिह्नित किए जाए। इसके अलावा बरसों से सड़क किनारे खड़े वाहनों को हटाया जाए। साथ ही पुलिस थानों के आसपास खड़े वाहनों को भी हटाया जाए ।

ग्रामसभाओं में अब एक चौथाई कोरम में पारित होंगे प्रस्ताव

ग्राम सभाओं में अब कोरम पूरा होने के लिए पंचायत की एक चौथाई जनसंख्या का होना अनिवार्य किया गया है।
ग्राम सभाओं में अब कोरम पूरा होने के लिए पंचायत की एक चौथाई जनसंख्या का होना अनिवार्य किया गया है। पहले ग्राम सभाओं में कोरम पूरा करने के लिए एक तिहाई जनसंख्या होती थी। प्रदेश सरकार ने विधानसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच मंगलवार को पंचायती राज संशोधन विधेयक पारित किया है।

अब ग्राम पंचायतों में होने वाली ग्राम सभाओं की बैठकों के कोरम में छूट मिलेेगी। विभाग का कहना है कि पहले ग्राम सभाओं में एक तिहाई कोरम के चलते कई पंचायतों में कोरम पूरा नहीं होता था। इसके चलते पंचायतों में जनहित के प्रस्ताव पारित नहीं हो पाते थे।

पंचायत प्रतिनिधियों ने तर्क दिया था कि लोग ग्राम सभाओं में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा रहे हैं। इसके चलते प्रदेश सरकार ने पंचायती राज संशोधन विधेयक का प्रस्ताव विधानसभा में लाया, जिसे मंगलवार को ध्वनिमत से पारित किया गया। इसके अलावा विधानसभा में हिमाचल प्रदेश निक्षेपकों के हित का संरक्षण अधिनियम संशोधन को भी सर्वसहमति से मंजूरी दी गई।
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जेबीटी से प्रमोशन को टेट पास करना जरूरी : सीएम

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि जेबीटी से प्रमोशन के लिए टेट पास करना जरूरी होगा। कनिष्ठ अध्यापक जो पदोन्नत होने हैं, उनके पद रिक्त पड़े हुए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि गत एक वर्ष में शिक्षा विभाग की ओर से कार्यरत कनिष्ठ बुनियादी अध्यापकों में से 153 को प्रशिक्षित स्नातक अध्यापक नॉन मेडिकल, 14 को टीजीटी मेडिकल और 48 को टीजीटी आर्ट्स तैनात किया गया है।

कुल 215 शिक्षकों को पदोन्नत किया गया है। सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा कि हालांकि पदोन्नति के लिए अध्यापक पात्रता परीक्षा से छूट का मामला उच्च न्यायालय और प्रशासनिक न्याय अभिकरण में भी विचाराधीन है। रोहडू़ के कांग्रेस विधायक मोहन लाल ब्राक्टा के सवाल के जवाब में सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा कि ठियोग-हाटकोटी सड़क से उन्हें उम्मीद है कि इसका काम जल्दी पूरा होगा। हिलोपा विधायक महेश्वर सिंह के सवाल के जवाब में सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा कि हर माध्यमिक स्कूल में टीजीटी आर्ट्स और टीजीटी मेडिकल के एक-एक पद सृजित किए गए हैं।

बाली को बोले कालिया, इंजीनियर कॉलेज खोलो धाम दूंगा
गगरेट विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के तहत राजकीय बहुतकनीकी संस्थान गगरेट सत्र 1995-96 में शुरू हुआ था। इसकी विधिवत अधिसूचना वर्ष 1997 में डा. बीआर अंबेडकर पालीटेकभनीक कॉलेज अंबोटा के नाम से जारी की गई थी। इस संस्थान के नाम पर 1.82 एकड़ भूमि राजस्व रिकार्ड में दर्ज है। ये जानकारी देते हुए तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि इसके लिए महज 1.8 एकड़ भूमि ही उपलब्ध है, जबकि इंजीनियरिंग कॉलेज को 10 एकड़ भूमि चाहिए।

हमने बहुतकनीकी संस्थानों को इंजीनियरिंग कॉलेज में नहीं बदला है। इससे पूर्व चिंतपूर्णी के कांग्रेस विधायक राकेश कालिया ने तकनीकी शिक्षा मंत्री जीएस बाली से पूछा था कि क्या कारण है कि इस स्कूल को अपग्रेड नहीं किया जा रहा है। उन्होंने बाली को ये कहा कि वे अगर ये कर लेते हैं तो उन्हें इसके लिए धाम भी दी जाएगी।
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