केंद्र सरकार ने भले ही सीधे पंचायतों को पैसा देने की बात कही हो, लेकिन यह पैसा पंचायत प्रधान अब मर्जी से नहीं खर्च सकेंगे।
- फोटो : Demo pic
हिमाचल सरकार ने हजारों पंचायत प्रधानों के हाथ बांध दिए हैं। केंद्र सरकार ने भले ही सीधे पंचायतों को पैसा देने की बात कही हो, लेकिन यह पैसा पंचायत प्रधान अब मर्जी से नहीं खर्च सकेंगे। सरकार ने जिला स्तर पर अफसरों और नुमाइंदों की कमेटी बनाने के निर्देश दिए हैं।
इस कमेटी में अफसरों के अलावा जिला परिषद और पंचायत समितियों के सदस्य होंगे। ग्राम सभाओं से प्रस्ताव पारित करने के बाद अंतिम स्वीकृति यही कमेटी देगी। इस कमेटी की अनुमति के बिना पंचायतों को पैसा नहीं मिलेगा। यह कमेटी किसी भी प्रस्ताव को रद्द भी कर सकती है।
प्रदेश सरकार ने सभी जिला पंचायत अधिकारियों को इस बारे में पत्र भेज दिए हैं। नए नियम के बाद पंचायत प्रधान अपनी मर्जी से न शेल्फ डाल सकेंगे और न ही योजनाओं को लागू करने के लिए किसी पर दबाव बना सकेंगे। कोई भी योजना लागू करने के लिए ग्रामसभा में शेल्फ डाली जाएगी।
ये लोग देंगे योजनाओं को मंजूरी
इन योजनाओं को चुने हुए नुमाइंदे, सेवानिवृत्त कर्मचारी, महिला मंडल, युवक मंडल व अन्य लोग स्वीकृति देंगे।
- फोटो : Demo pic
इन योजनाओं को चुने हुए नुमाइंदे, सेवानिवृत्त कर्मचारी, महिला मंडल, युवक मंडल व अन्य लोग स्वीकृति देंगे। अगर पंचायत प्रधान व उपप्रधान शेल्फ के खिलाफ भी हैं तो इनकी नहीं चलेगी। ग्राम सभा में बहुमत होने पर प्रस्ताव पारित किया जा सकता है।
हिमाचल में 3226 पंचायतें, 12 जिला परिषद और 80 पंचायत समितियां हैं। जिला परिषद और पंचायत समितियों के सदस्यों की वित्तीय शक्तियां छीनने के बाद अब पंचायत प्रधानों की शक्तियों पर कटौती की जा रही है। पंचायत प्रधानों का काम अब सिर्फ सुझाव देना और कार्यों की निगरानी करना होगा।
'जिला स्तर पर बनाई गई कमेटी ग्राम सभा में पारित प्रस्ताव को देखेगी। अगर प्रस्ताव में गड़बड़ी या मर्जी से कोई स्कीम डाली होगी तो उसे कमेटी रद्द कर देगी। अगर ग्राम सभा किसी विकास कार्य को करवाने में सहमत है और प्रधान या उपप्रधान उस काम को नहीं करना चाहता तो भी ग्राम सभा का बहुमत देखकर प्रस्ताव पारित माना जाएगा।'- केवल शर्मा, ज्वाइंट डायरेक्टर पंचायती राज विभाग