फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अंग्रेजों ने चलाया था 1 रुपया का पहला नोट, ये है भारत की करंसी का इतिहास

Thu, 10 Nov 2016 09:03 AM IST
अरविंद ठाकुर/टीम डिजिटल, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन
19वीं सदी में अंग्रेजों ने पेपर करंसी की शुरूआत की। इस पर जार्ज V की फोटो लगी हुई थी। 1861 में पेपर करंसी एक्ट लाया गया। 1923 में 1, 2½, 5, 10, 50, 100, 1,000, 10,000 रुपये के नोट जारी हुए। भारतीय रिजर्व बैंक 1 अप्रैल 1935 को स्‍थापित हुआ। इसका मुख्यालय कोलकाता में बनाया गया।
विज्ञापन


आरबीआई एक्ट 1934 के सेक्‍शन 22 के तहत बैंक को करंसी छापने का अधिकार दिया गया। भारतीय रिजर्व बैंक ने 1938 में पहली बार 5 रुपये का नोट जारी किया जिस पर जार्ज VI की फोटो लगी हुई थी। इसके बाद फरवरी 1938 में 10 रुपये का नोट, मार्च 1938 में 100 के नोट और 1000 और दस हजार के नोट जून में जारी किए। इन नोटों पर पर सर जेम्स टेलर के हस्ताक्षर होते थे। 1940 में 1 रुपये का नोट जारी किया गया।
विज्ञापन

सुरक्षा धागा फीचर भी अंग्रेजों ने जोड़ा

इसके बाद सुरक्षा धागा जैसे फीचर नोट में जोड़े गए। 1950 तक जार्ज VI सीरीज के नोट देश में चलते रहे। 1510 में पुर्तगाली आए और उन्होंने गोआ पर कब्जा कर लिया। उन्होंने रूपिया करंसी चलाई। इप पर पुर्तगाल के राजा की तस्वीर छपी होती थी। इन्होंने 5,10, 20, 50,100 और 500 के नोट जारी किए। 

फ्रांसीसी भी अपनी करंसी चला कर गए। इनकी करंसी बैंक ऑफ इंडोशीन ने छापी। इन्होंने 1, 5 और 50 रुपये के नोट जारी किए। हैदराबादी करंसी 1916 से 1952 तक देश में चलती रही। बर्मा (म्यामांर) ने भारत की तर्ज पर करंसी चलाई। इन्होंने 1/4, 1/2, 1, 5 और 10 के नोट जारी किए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें