मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि प्रदेश में निजी भूमि पर एक जगह से दूसरी जगह बने पुराने रास्तों को बंद किए जाने पर सरकार सख्त कदम उठाने जा रही है। सदियों से चल रहे रास्ते को रोक जाने पर लोगों के बिजली और पानी का कनेक्शन काट दिए जाएंगे। इसको लेकर नियम और कानून का भी ध्यान रखा जाएगा। लोगों के क्या अधिकार हैं, इस पर भी सरकार अध्ययन कर रही है। सीएम ने कहा कि एक्ट में जो शब्दावली है, उसमें भी बदलाव करने की जरूरत है। एक्ट में ऐसी कई शब्दावली हैं, जो समझ से परे है।
कांग्रेस विधायक इंद्रदत्त लखनपाल की ओर से लाए गए संकल्प का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, कांगड़ा में यह समस्या सबसे ज्यादा है। उन्होंने कहा कि स्कूल जाने वाले रास्ते तक बंद कर दिए गए हैं। एसडीएम को 133 के तहत यह शक्तियां है कि वह पुलिस, राजस्व विभाग के सहयोग से बंद रास्तों को खुलवा सकते हैं। अगर कोई भी फिर भी नहीं मानता है तो सीआरपीसी 188 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। लेकिन इसको लेकर भी लोग कोर्ट में जाकर मामलों को सालों लटका देते हैं। ऐसे में इन सभी को देखते हुए सरकार इसी सत्र में इस एक्ट में संशोधन करने जा रही है। सीएम के आश्वासन के बाद लखनपाल ने अपना संकल्प वापस ले लिया।
इससे पहले राजस्व मंत्री की जगह पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि जैसे-जैसे जनसंख्या बढ़ती जा रही है वैसे-वैसे इस तरह के मामले बढ़ते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि संयुक्त परिवारों के विभाजन से भूमि पर दबाव बढ़ रहा है। इस तरह के विवादों को किस तरह सुलझाया जाए यह राजस्व रिकॉर्ड में लिखा है। उन्होंने कहा कि जो एक खेत से दूसरे खेत में जाने का मामला आता है तो राजस्व में वाजिभ अल उर्ज में बताया गया है कि किस तरह इसे निपटाया जाए। अगर हल चलाने के लिए बैल को खड़ी फसल से ले जाना पड़े तो बैलों के मुंह मे छिकड़ी लगानी पड़ती है।
भाई- भाई भी रोक देते हैं एक दूसरे का रास्ता
कांग्रेस विधायक इंद्रदत लखनपाल ने संकल्प लाते हुए कहा कि रास्तों को बंद किए जाने से क्राइम रेट बढ़ता जा रहा है। जब परिवार विभाजित होता है तो एक भाई अन्य भाइयों के घर को जाने वाले रास्ते को रोक देता है। वहीं चर्चा में भाग लेते हुए विनोद सुलतनपुरी ने कहा कि यह गंभीर विषय है इस पर विचार होना जरूरी है।