हिमाचल प्रदेश शिक्षक महासंघ ने दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों को आंतरिक परीक्षाओं के परिणाम के आधार पर प्रमोट करने की मांग उठाई है। बुधवार को संघ के एक प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह ठाकुर से मुलाकात कर कहा कि फर्स्ट और सेकेंड टर्म की परीक्षाओं के 60 फीसदी, प्री-बोर्ड परीक्षाओं के 25 फीसदी अंकों और शिक्षकों के आंतरिक मूल्यांकन के 15 फीसदी अंकों के आधार पर शिक्षकों को प्रमोट करने की वकालत की। महासंघ के प्रतिनिधियों ने कहा कि कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ने के चलते दसवीं कक्षा की परीक्षाएं अब नहीं होनी चाहिए।
महासंघ के प्रांत अध्यक्ष पवन कुमार, संगठन मंत्री पवन मिश्रा, महामंत्री विनोद सूद, उपाध्यक्ष डॉ. मामराज पुंडिर और सह संगठन मंत्री भीष्म ने दो मई से शिक्षकों को रोटेशन आधार पर स्कूलों को बुलाने की पैरवी की। बारहवीं कक्षा की परीक्षाएं हालात सामान्य होने पर लेने की मांग की। ऑनलाइन पढ़ाई को दोबारा से मजबूती से शुरू करने की मांग भी शिक्षा मंत्री से की गई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए चल रहे टीकाकरण अभियान में पात्र शिक्षकों और विद्यार्थियों को शामिल किया जाना अनिवार्य किया जाए।
इसके बिना परिसर में प्रवेश पर रोक लगाई जाए। प्रतिनिधिमंडल ने भाषा अध्यापकों और शास्त्री अध्यापकों को टीजीटी का दर्जा देने, एसएमसी अध्यापको के लिए तर्क संगत नीति बना कर नियमित करने, जिन अध्यापकों को 8 वर्ष का कार्यकाल इसी नीति में हो गया है, उन्हें नियमित करने और वर्तमान में इनके नियुक्ति स्थान पर अन्य अध्यापक न भेजे जाने की मांग की।
इसके अलावा एक जनवरी 2004 से पूर्व की पेंशन योजना को बहाल करने, प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय के अधीन प्रशिक्षित स्नातक कैडर को उच्च शिक्षा निदेशालय के अधीन लाने की मांग की। मुख्याध्यापक, प्रधानाचार्य तथा खंड प्रारंभिक शिक्षा अधिकारी की पदोन्नति पर 3 महीने का प्रशिक्षण अनिवार्य करने को कहा। कभी-कभी विद्यालय में बच्चों से बातचीत के लिए विषय विशेषज्ञ या मनोवैज्ञानिकों को बुलाने की मांग की। सेवानिवृत्ति की आयु 62 वर्ष करने की मांग भी की।