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डॉ. सोनम वांगचुक: आपदा नहीं, तैयारी और सतर्कता में कमी से जा रही जानें

Sun, 19 Dec 2021 08:53 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

डॉ. सोनम वांगचुक ने कहा कि सिर्फ सरकार या सिस्टम पर ही सब कुछ छोड़ने की बजाय सरकार से लेकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक को जिम्मेदारी निभानी चाहिए, तभी जलवायु परिवर्तन से होने वाले खतरों से निपटा जा सकेगा।
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शिमला में क्लाइमेट चेंज कॉन्क्लेव। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सर्दियों में पहाड़ी लोग हमेशा तैयारी करके रखते हैं। इसी वजह ठंड के मौसम में पहाड़ों में मैदानी क्षेत्रों की तुलना में लोगों की मौत कम होती है। इसी भावना के साथ ही आपदाओं को लेकर तैयारी रखना जरूरी है। यह बात स्टूडेंट्स एजूकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख के संस्थापक निदेशक डॉ. सोनम वांगचुक ने हिमाचल प्रदेश जलवायु सम्मेलन के दौरान कही। उन्होंने कहा कि आपदा से नहीं बल्कि सतर्कता और तैयारी में कमी की वजह से लोगों की जानें जाती हैं। चिली समेत कई देशों में हुई कई बड़ी आपदाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि तैयार और सतर्क रहने की वजह से ही उन देशों में लोगों की कीमती जान का नुकसान कम हुआ।

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सिर्फ सरकार या सिस्टम पर ही सब कुछ छोड़ने की बजाय सरकार से लेकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक को जिम्मेदारी निभानी चाहिए, तभी जलवायु परिवर्तन से होने वाले खतरों से निपटा जा सकेगा। पूर्वजों से भी काफी कुछ सीखा जा सकता है। 2010 में लद्दाख में अचानक आई बाढ़ का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय मिट्टी से बने घरों को कम नुकसान हुआ क्योंकि लोग आपदा के रास्ते में घर नहीं बनाते थे, लेकिन कंक्रीट और लोहे की मजबूती की गलतफहमी की वजह से बाढ़ के रास्ते में पहुंच गए और उससे नुकसान ज्यादा हुआ।

इससे पहले एनडीएमए के एडवाइजर कुणाल सत्यार्थी ने कहा कि केंद्र सरकार 350 अति संवेदनशील जिलों में एक लाख आपदा मित्र तैयार कर रही है, ताकि आपदा के समय सबसे पहले प्रशिक्षित स्थानीय युवा बचाव के कार्य में जुट जाएं। वहीं, पूरे देश में किसी भी तरह की आपदा के लिए 112 को ही एक कॉमन नंबर के तौर पर उपयोग करने की भी तैयारी है। इससे पहले राजस्थान में वृक्षमित्र कहे जाने वाले पद्मश्री हिम्मताराम भांभू ने भी पौधरोपण के जरिये जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने को लेकर अपने विचार व्यक्त किए।
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भारतीय हिमालय क्षेत्र के लिए तैयार किया जाए विशेष फंड
राजधानी शिमला स्थित होटल पीटरहॉफ में चल रहे हिमाचल प्रदेश क्लाइमेट चेंज कॉन्क्लेव के दौरान भारतीय हिमालीय क्षेत्र में मौसम में बदलाव से निपटने के लिए विशेष फंड तैयार करने का प्रस्ताव पास हुआ। प्रस्ताव 21 में पूर्व चेतावनी प्रणाली प्रोटोकॉल को मौसम में हो रहे बदलाव से बढ़ते रिस्क से निपटने के लिए अल्पकालिक और आधारभूत ढांचा निर्माण को दीर्घकालिक उपाय के तौर पर विकसित करने के अलावा राज्य और जिला स्तर पर क्लाइमेट रिसर्च को बढ़ावा देने और जिलावार मौसम व आपदा रिस्क को चिह्नित करने के लिए कहा गया।

दो दिवसीय इस सम्मेलन के दौरान करीब दो सौ से ज्यादा विशेषज्ञों ने भाग लिया। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों और प्रदेशों से आए विषय विशेषज्ञों ने मौसम में बदलाव और उससे उत्पन्न हो रहे खतरों से निपटने को लेकर अपने सुझाव दिए। इसके अलावा हिमालयी क्षेत्र में स्थित संस्थानों को स्थानीय मौसम के अनुसार शोध करने और उसके लिए व्यवहारिक उपाय बताने के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में ईको साक्षरता व क्लाइमेट साक्षरता को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।

इसके अलावा मौसम व आपदा के रिस्क को कम करने के उद्देश्य से हिमालयी क्षेत्र के लिए अलग से कांसेप्ट भी तैयार करने का प्रस्ताव पास किया गया। समापन पर मुख्य अतिथि के रूप में  स्टूडेंट्स एजूकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख के संस्थापक निदेशक डॉ. सोनम वांगचुक के अलावा एसीएस पर्यावरण प्रबोध सक्सेना, एडवाइजर एनडीएमए कुणाल सत्यार्थी समेत अन्य प्रमुख वक्ता मौजूद थे। 

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