बुजुर्गों के अधिकारों पर उमंग फाउंडेशन के वेबिनार में पेश किए गए आंकड़े चौंकाने वाले हैं। बहुओं से ज्यादा बेटे, बुजुर्ग माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार करते हैं। देशभर में एक चौथाई और प्रदेश में 20 प्रतिशत बुजुर्ग दुर्व्यवहार का शिकार हैं। आजादी के अमृत महोत्सव और हिमाचल की स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में उमंग फाउंडेशन के साप्ताहिक वेबिनारों की 14 वीं श्रंखला में ‘बुजुर्गों के मानवाधिकार और उनके संरक्षण में युवाओं की भूमिका’ विषय पर हुए कार्यक्रम में यह खुलासा हुआ है।
बुजुर्गों के लिए कार्यरत अंतरराष्ट्रीय संस्था हेल्प एज इंडिया के हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के राज्य प्रमुख डॉ. राजेश कुमार विशेषज्ञ वक्ता के रूप में शिरकत की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्तर पर 25 और हिमाचल में 20 प्रतिशत बुजुर्ग दुर्व्यवहार का शिकार बनते हैं। हैरानी की बात यह है कि बुजुर्ग माता-पिता के साथ बहुओं की अपेक्षा बेटे ज्यादा दुर्व्यवहार करते हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर यह दर 52 प्रतिशत है। हिमाचल में 54 प्रतिशत बेटे और 46 प्रतिशत बहुएं बुजुर्ग माता-पिता के साथ दुर्व्यवहार करती हैं। इस अवसर पर कार्यक्रम के संयोजक और विवि समाजशास्त्र में पीएचडी स्कॉलर अभिषेक भागड़ा और उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष प्रो. अजय श्रीवास्तव मौजूद रहे।
5.30 करोड़ से ज्यादा बुजुर्ग गरीबी रेखा से नीचे
डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि वर्ष 2018 में विश्व स्तर पर बुजुर्गों की स्थिति को लेकर संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत बुजुर्गों के रहने लायक देश नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत में 10 करोड़ से अधिक बुजुर्ग हैं। इसमें से 5.30 करोड़ से ज्यादा गरीबी रेखा से नीचे हैं। कुल बुजुर्गों में से 10 से 15 प्रतिशत बेसहारा विधवाएं हैं। देश में 25 प्रतिशत से अधिक बुजुर्गों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
लगभग 52 प्रतिशत बुजुर्ग ऐसे हैं जिन्हें परिवार से कोई मदद नहीं मिलती। डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि हेल्प एज इंडिया सरकार से बुजुर्गों को कम से कम 2 हजार रुपये प्रति माह पेंशन दिलवाने के लिए प्रयास कर रही है। उनके अनुसार 3 वर्ष पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में हर जिले में कम से कम एक वृद्ध आश्रम बनाने के आदेश दिए थे, लेकिन इस पर भी अमल नहीं हो पा रहा है।