प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र काजा में एसजेवीएन एक हजार मेगावाट का सोलर पार्क बनाएगा। केंद्र सरकार ने एसजेवीएन को हिमाचल सरकार के साथ मिलकर इस पर कार्य करने की हरी झंडी दे दी है। इसी कड़ी में शीत मरुस्थल लाहौल घाटी में उत्पादित सौर ऊर्जा को ट्रांसमिशन लाइनों के जरिये बाहर निकालने के लिए हिमाचल सरकार ने वर्ल्ड बैंक को प्रस्ताव भेजा है। बुधवार को एसजेवीएन के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक नंदलाल शर्मा ने राजधानी शिमला स्थित अपने कॉरपोरेट कार्यालय में प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी।
नंदलाल शर्मा ने बताया कि काजा में एक हजार मेगावाट का सोलर पार्क प्रस्तावित है। ट्रांसमिशन लाइन की समस्या हल होते ही इस पर काम शुुरू करेंगे। प्रदेश में अगर आसानी से जमीन मिलती है तो वहां भी सौर ऊर्जा उत्पादित करने के लिए काम करेंगे। जल विद्युत परियोजनाओं के लिए चिनाब बेसिन में भी ज्यादा संभावनाएं हैं।
तीन पर काम जारी है। सरकार से अन्य परियोजनाएं भी मांगी हैं। सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। जल्द ही फैसला होने की उम्मीद है। नंदलाल शर्मा ने बताया कि सतलुज बेसिन पर जंगी थोपन परियोजना पर भी काम जारी है। चीन की मशीनरी की खरीद बंद कर दी है। भारत में भी कई मशीनों का निर्माण शुरू हो गया है। वर्ष 2023 तक एसजेवीएन को पांच हजार मेगावॉट की कंपनी बनाने का लक्ष्य है।
पांच साल में 35 हजार करोड़ का करेंगे नया निवेश
एसजेवीएन अध्यक्ष ने बताया कि आगामी पांच वर्षों में 35 हजार करोड़ का नए निवेश का लक्ष्य है। इसके लिए केंद्र या राज्य सरकार से पैसा नहीं लेंगे। एसजेवीएन अपने लाभ से ही इसका इंतजाम करेगा। बीते 15 वर्षों में 17300 करोड़ का लाभ अर्जित किया है। इसमें से चार हजार करोड़ केंद्र और 1949 करोड़ हिमाचल सरकार का हिस्सा दिया है। प्रदेश सरकार को करीब चार हजार करोड़ की निशुल्क बिजली भी दी है। बीते वर्ष लक्ष्य से एक हजार मेगावाट अधिक उत्पादन किया।
तय समय में पूरा होगा लूहरी और धौलासिद्ध प्रोजेक्ट
लूहरी और धौलासिद्ध हाईड्रो परियोजनाओं के लिए निवेश मंजूरी मिलने पर केंद्र का आभार जताते हुए एसजेवीएन अध्यक्ष ने बताया कि दोनों परियोजनाओं का काम तय समय में पूरा होगा। 210 मेगावाट की लूहरी परियोजना चरण एक में 1810 करोड़ का निवेश होगा। 66 मेगावाट की धौलासिद्ध परियोजना को 52 माह में पूरा किया जाएगा। 687 करोड़ का यहां निवेश होगा।