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आरटीआई में हुआ खुलासा: शिक्षा विभाग ने बिना टेंडर खरीदीं छह करोड़ की किताबें

Tue, 14 Sep 2021 11:12 AM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, शिमला

सार

समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक डॉ. वीरेंद्र शर्मा का कहना है कि यह मामला उनके कार्यकाल का नहीं है। इसको लेकर शिकायत आई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पुस्तकालयों के लिए चल रही किताब खरीद प्रक्रिया के बीच वर्ष 2019-20 की खरीद चर्चा में आ गई है। इस दौरान समग्र शिक्षा अभियान के तहत शिक्षा विभाग ने बिना टेंडर छह करोड़ रुपये की किताबें खरीदी थीं। छठी से बारहवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए एक ही विषय की 4,745 किताबें 72 लाख रुपये में खरीदी गईं। दिल्ली के एक प्रकाशक को सिंगल ऑर्डर में 1.45 करोड़ रुपये की किताबें खरीदने का काम दिया गया। इस खरीद का खुलासा आरटीआई में हुआ है। 

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उत्तर मध्य भारत हिंदी प्रकाशक संघ के संरक्षक अरुण माहेश्वरी ने बताया कि 2019-20 में पुस्तकालयों के लिए हिमाचल प्रदेश समग्र शिक्षा को लगभग 11 करोड़ रुपये केंद्र सरकार से मिले थे। इसमें से लगभग 6 करोड़ रुपये की किताबें निजी प्रकाशकों के माध्यम से बिना टेंडर के खरीदी गईं। नियमों के विपरीत 50 फीसदी से अधिक की राशि का उपयोग निजी प्रकाशकों से बिना किसी टेंडर प्रक्रिया अपनाए किया गया। निजी प्रकाशकों को 2 करोड़ रुपये का अनुचित लाभ दिया गया।

समग्र शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना निदेशक डॉ. वीरेंद्र शर्मा का कहना है कि यह मामला उनके कार्यकाल का नहीं है। इसको लेकर शिकायत आई है। वहीं, प्रकाशकों ने तय किया है कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से इस मामले को उठाया जाएगा। मंगलवार को केंद्रीय शिक्षा विभाग के सचिव ने भी प्रकाशक संघ को बुलाया है।
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जिन्हें बीते वर्ष बिना टेंडर काम दिया, अब दोबारा उन्हीं का चयन
प्रकाशक संघ के संरक्षक सत्य प्रकाश सिंह ने कहा है कि जिन दस फर्मों को बीते वर्ष बिना टेंडर काम दिया गया, उनमें से कई को दोबारा चुन लिया गया है। इस वर्ष 850 से अधिक प्रकाशकों ने लाखों रुपये की हजारों किताबें जमा की हैं लेकिन 99 फीसदी खरीद उन्हीं फर्मों से की जा रही है, जिनसे वित्तीय वर्ष 2019-20 में की गई थी।

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