जोगिंद्रनगर के जलपेहर सरकारी स्कूल में शिक्षा-दीक्षा हासिल करने के बाद संघ की खातिर उन्होंने 1985 में एनएचपीसी की नौकरी छोड़ी और संघ के पूर्ण प्रचारक बन गए।12 सितम्बर 2014 को विदेश मामलों पर स्थायी समिति के सदस्य चुने गए। पर्यटन और संस्कृति मंत्रालय के तहत परामर्श समिति के सदस्य भी रहे।
मंडी के शिवरात्रि महोत्सव के शुभारंभ पर 12 मार्च को जब लोगों ने उनकी हालत देखी तो हर कोई स्तब्ध था। उसी दिन शाम को सांस्कृतिक संध्या में भी उनके स्वास्थ्य को लेकर नेताओं में चर्चा बनी हुई थी। रामस्वरूप शर्मा खुद को मोदी का सुदामा बताते थे, उन्होंने मंडी का नाम छोटी काशी के रूप में उभारा। रामस्वरूप शर्मा ने 1985 तक एनएचपीसी में नौकरी की थी व कबड्डी के खिलाड़ी भी रहे। चंबा में इसी दौरान आरएसएस से जुड़ गए व प्रचारक बन गए। उसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्हें भाजपा का टिकट मिला।
रामस्वरूप शर्मा इस बार मंडी संसदीय क्षेत्र से दूसरी बार सांसद बने थे। संगठन के कार्यों में भी वह सक्रिय रहते थे। जिला मंडी के भाजपा अध्यक्ष रणवीर सिंह ने बताया कि सांसद के निधन की सूचना मिली है। पार्टी पदाधिकारी व कुछ उनके करीबी लोग दिल्ली के लिए रवाना हुए हैं।
प्रदेश के शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि नरेंद्र मोदी जब हिमाचल के प्रभारी थे तो रामस्वरूप शर्मा को संगठन महामंत्री के रूप में नियुक्त किया गया। वे अनेक पदों पर काम करते रहे। मंच पर जाने से भी संकोच करते थे। संगठन मंत्री के नाते पीछे ही रहते थे, पर संगठन के लिए समर्पित थे।