उत्तर : ये बातें दोनों तरफ की होती हैं। कभी-कभी राजनेताओं को लगता है कि अफसर नहीं सुन रहे। अफसरों को लगता है कि हम पर हस्तक्षेप कर रहे हैं। दोनों तरह की बातों में वक्त लगता है। हमें अपना रवैया पॉजिटिव रखना होगा, तो मिनटों में चीजें हल होंगी।
प्रश्न: भारतीय प्रशासनिक सेवाओं में आए तो सोचा था कि चीफ सेक्रेटरी बनेंगे?
उत्तर: वर्ष 1987 में आईएएस में आया। प्रदेश में एसडीएम पालमपुर रहा। डीसी शिमला रहा। कई विभागों का सचिव रहा। चार साल में ही ऊर्जा, वन, उद्योग और कई अन्य महत्वपूर्ण महकमे देखे। ये उम्र, पॉजिशनिंग आदि पर निर्भर करता है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पढ़ा। एनडीए के रास्ते पहले सेना में रहा, मध्य प्रदेश पुलिस सेवा में रहे। माता और पिता की मृत्यु होने के बाद पैतृक स्थान से नाता टूट गया। अब शिमला में ही रहते हैं।