जान की परवाह किए बगैर ग्रामीण लापता को ढूंढते रहे
अब गांव का हर घर उस परिवार की यादों से गूंज रहा है और लोग एक-दूसरे को ढांढस बंधाते हुए बस यही कह रहे हैं कि काश यह हादसा न हुआ होता। घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने मौके पर मलबे में दबे हुए पांचों लोगों को तलाशने का कार्य शुरू किया। जान की परवाह किए बगैर ग्रामीण लापता हुए परिवार के सदस्यों को ढूंढते रहे। इससे पहले बारिश के दौरान आनी क्षेत्र में ऐसा ही भूस्खलन हुआ था, जिसमें दो महिलाओं की मलबे में दबकर मौत हो गई थी। इस साल बरसात से क्षेत्र में भूस्खलन के कारण जानमाल को भारी नुकसान हुआ है।
हादसे में घायल हुईं कला देवी ने ये कहा
हादसे में घायल हुईं कला देवी ने बताया कि रात करीब 1:30 बजे जब पहाड़ी से भारी भूस्खलन हुआ, तो वे सभी गहरी नींद में सोए हुए थे। घटना के बाद पहले उनके पति धर्मदास उनके पास पहुंचे और उन्होंने सो रही कला देवी को उठाया। इस दौरान पहाड़ी से एक पत्थर आया और उसके सिर पर लगा। इससे वह बुरी तरह से डर गईं। इसके बाद जब वे कमरे से बाहर निकले, तो देखा कि घर की छत ही नहीं है और मौके पर मलबा ही मलबा भर गया है। घटना के बाद ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायल हुए तीन लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया। घटना में बुरी तरह से जख्मी हुए शिवराम को कुर्सी पर बिठाकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाया गया। इस घटना को लेकर लोगों में दहशत है।
सुबह 11:40 बजे निकाला आखिरी शव
सुबह करीब छह बजे प्रशासन, पुलिस, गृहरक्षा के जवानों और ग्रामीणों ने लापता लोगों की तलाश शुरू की। सुबह साढ़े छह बजे मलबे में दबा पहला शव बरामद हुआ, जबकि इसके बाद कुछ देरी के बाद शव मिलते रहे और सुबह दस बजे तक कुल चार शवों को मलबे से निकाला जा चुका था। सुबह साढ़े दस बजे कोटला से एनडीआरएफ का दल मौके पर पहुंचा और मलबे में दबे आखिरी शव की तलाश शुरू की। सुबह 11:40 बजे मलबे से आखिरी शव निकाला गया। पांच शवों को देखकर हर कोई सहमा था।