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किन्नौर हादसा: गाड़ी पर गिरे पत्थर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने 300 मीटर दौड़कर बचाई जान

Mon, 26 Jul 2021 08:47 PM IST
अरविन्द ठाकुर अमर उजाला नेटवर्क, किन्नौर/खरड़

सार

पहाड़ों में घूमने के शौकीन नवीन ने किन्नौर व लाहौल-स्पीति जाने का प्रोग्राम बनाया था। वह दिल्ली की एक टेंपो ट्रेवल के साथ टूर पर रवाना हुए थे।
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किन्नौर में भूस्खलन। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले के बटसेरी में रविवार दोपहर एक बजे पहाड़ी से गिरी चट्टानें पर्यटकों के वाहन से टकराईं तो दो पर्यटक छिटककर बाहर गिर गए। इनमें एक मोहाली के खरड़ के रहने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर नवीन भारद्वाज हैं। नवीन ने 300 मीटर भागकर जान बचाई। हादसे के बाद नवीन ने अपने पिता बलबीर सिंह से फोन पर बात की। 37 साल के नवीन दिल्ली की एक कंपनी में जॉब करते हैं। लॉकडाउन में वर्क फ्रॉम होम के चलते खरड़ में ही थे।

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इसमें ढील के बाद पहाड़ों में घूमने के शौकीन नवीन ने किन्नौर व लाहौल-स्पीति जाने का प्रोग्राम बनाया था। वह दिल्ली की एक टेंपो ट्रेवल के साथ टूर पर रवाना हुए थे। उनके साथ सवार 9 लोग हादसे में मारे गए। पहाड़ से पत्थर टेंपो ट्रेवल पर ही गिरे। नवीन पत्थर गिरने से पहले ही बाहर आ गिरे। उन्होंने 300 मीटर भाग कर जान बचाई। दिल्ली के शिरील ओबरॉय (39) भी उनके साथ थे।

वह भी किस्मत वाले निकले। नवीन ने अपने पिता को बताया कि वाहन हवा में उड़कर करीब 600 मीटर गहरी खाई में जा गिरा। चट्टान की ओट लेने के बाद वह बेहोश हो गए। होश आया तो पता चला कि उनके साथ आए अंजान दोस्त काल का ग्रास बन गए हैं। नवीन ने बताया कि गुरुवार को उन समेत 11 लोग दिल्ली में एकत्रित हुए थे। अधिकतर अलग-अलग राज्य से थे। उनकी कोई जान पहचान नहीं थी। हिमाचल में उनका करीब एक सप्ताह का टूर था।
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बीते वीरवार को सभी दिल्ली से चंडीगढ़ होते हुए नारकंडा पहुंचे। यहां विश्राम करने के बाद शनिवार को उनका दल छितकुल पहुंचा। रविवार को कल्पा के लिए रवाना हुआ। छितकुल से कल्पा और यहां से नाको काजा होते हुए मनाली पहुंचने का कार्यक्रम था, लेकिन तकदीर को कुछ और ही मंजूर था।

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