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बद्दी में चार हफ्ते में स्थिति सुधारो वरना बंद करने पड़ेंगे उद्योग: हाईकोर्ट

Fri, 07 Oct 2016 08:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
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हिमाचल हाईकोर्ट
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प्रदेश सरकार ने सोलन जिले के बद्दी क्षेत्र में उद्योगों द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण के मामले में हाईकोर्ट को बताया कि बद्दी में हर प्रकार की औद्योगिक इकाइयों को कॉमन एफफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट से जोड़े जाने को सुनिश्चित बनाने के लिए प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय एक कमेटी का गठन किया है। 
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यह कमेटी उद्योगों के कनेक्शनों की निगरानी रखेगी और उनकी प्लांट से कनेक्शन लेने में मदद करेगी। यह कमेटी हर पंद्रह दिन में अपनी रिपोर्ट पर्यावरण सचिव को सौंपेगी। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने इस वक्तव्य के बाद कमेटी को आदेश दिए कि चार सप्ताह के भीतर वांछित कार्रवाई करे वरना कोर्ट को उद्योग बंद करने के आदेश पारित करने पड़ेंगे।

ये है सारा मामला

मामले के अनुसार सोलन जिला के बद्दी में औद्योगिक इकाइयों से निकलने वाले गंदे पानी का सही से उपचार न होने के कारण बद्दी क्षेत्र में प्रदूषण की मात्रा लगातार बढ़ रही है। करीब 60 करोड़ की लागत से इस क्षेत्र में कॉमन एफफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया है।

इसकी प्रस्तावित क्षमता 250 लाख लीटर प्रतिदिन गंदे पानी का उपचार करने की है जबकि इसमें 110 लाख लीटर प्रतिदिन गंदे पानी का ही उपचार किया जा रहा है। ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता से कम दोहन किए जाने की बात जिला परिषद सोलन की त्रैमासिक बैठक में सामने आई थी। मामले पर सुनवाई 9 नवंबर को होगी। 
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हाटकोटी एनएच से लगते अवैध कब्जे हटाने के आदेश

प्रदेश हाईकोर्ट ने ठियोग-हाटकोटी-रोहड़ू नेशनल हाईवे से लगते तमाम अवैध कब्जों को हटाने के आदेश पारित किए हैं। कोर्ट ने एसपी शिमला को आदेश दिए कि वह सड़क कार्य में बाधा उत्पन्न करने वालों के खिलाफ  फौरन कार्यवाई करे। कोर्ट ने ठेकेदार को आदेश दिए हैं कि वह ठेके की शर्तों को अक्षरश: पूरा करे। 

मामले पर हुई सुनवाई के दौरान सरकार ने बताया कि प्रोंठी गांव के कुछ लोग सड़क कार्य में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने इन तथ्यों के दृष्टिगत यह आदेश पारित किए। गौरतलब है कि पूर्व बागवानी मंत्री नरेंद्र बरागटा ने साल 2014 में याचिका दायर कर सड़क कार्य को शीघ्र पूरा करने बाबत 

सरकार व ठेकेदार को जरूरी दिशा निर्देश दिए जाने की मांग की थी। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और समय समय पर सरकार व ठेकेदार को जरूरी आदेश दिए। सड़क के कार्य की निगरानी के लिए दो सदस्यीय कमेटी का गठन भी किया गया। यह कमेटी महीने में दो बार सड़क कार्य की निगरानी कर कोर्ट के समक्ष अपनी रिपोर्ट पेश करती है।
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