प्रोसेस सर्वर ने इसके बाद प्रतिवादी को फि र से तलाशने की कोई कोशिश नहीं की और अपनी रिपोर्ट के साथ समन को बिना सर्विस के ही हाईकोर्ट को भेज दिया। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने अक्तूबर 2017 में प्रदेश की निचली अदालतों को निर्देश जारी किए हुए हैं कि प्रोसेस सर्वर को अपनी रिपोर्ट से पहले बार-बार समन सर्व करने के लिए जाना होगा ताकि नोटिस की तामील हो सके।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि प्रोसेस सर्वर इस मामले में केवल एक बार ही प्रतिवादी के घर गया था और उसने जानबूझकर हाईकोर्ट द्वारा जारी आदेशों की अवहेलना की। मामले पर सुनवाई 27 फ रवरी को होगी।