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Himachal: करुणामूलक नियुक्ति पर छह सप्ताह में निर्णय ले राज्य सरकार, हाईकोर्ट ने दिए निर्देश

Tue, 26 Aug 2025 12:14 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

 न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता का आवेदन 9 जून 2021 को ही संबंधित अधिकारियों को भेजा जा चुका था, लेकिन उस पर अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। 
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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रतिवादी राज्य सरकार को निर्देश दिए हैं कि वे याचिकाकर्ता की करुणामूलक के आधार पर नियुक्ति के आवेदन पर छह सप्ताह के भीतर उचित निर्णय ले। याचिकाकर्ता की ओर से अदालत को बताया कि उनके पति जो शिक्षा विभाग में टीजीटी के पद पर कार्यरत थे, का सेवाकाल के दौरान निधन हो गया था। इसके बाद उनकी पत्नी याचिकाकर्ता निशा कुमारी ने करुणामूलक के आधार पर नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन विभाग की ओर से बार-बार अनुरोध करने के बावजूद इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। न्यायाधीश संदीप शर्मा की अदालत ने सुनवाई के दौरान पाया कि याचिकाकर्ता का आवेदन 9 जून 2021 को ही संबंधित अधिकारियों को भेजा जा चुका था, लेकिन उस पर अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि करुणा के आधार पर नियुक्ति के आवेदन पर विचार करते समय कर्मचारी की मृत्यु के समय लागू नीति को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

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कुष्ठ रोगी कॉलोनी की स्टेटस रिपोर्ट तलब
प्रदेश हाईकोर्ट ने फागली स्थित सर्वोदय कुष्ठ रोगी कॉलोनी में खराब रखरखाव की स्थिति पर चिंता जताई है। अदालत ने इसे लेकर सरकार को स्टेटस रिपोर्ट दायर करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश दायर एक जनहित याचिका के माध्यम से दिए। याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता को कुष्ठ रोग से पीड़ित होने के कारण 29 दिसंबर, 2012 को सर्वोदय कुष्ठ रोगी कॉलोनी फागली के ब्लॉक-ए में कमरा नंबर 4 आवंटित किया गया था। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कॉलोनी का रखरखाव बहुत खराब है और इस संबंध में एक अभ्यावेदन भी प्रस्तुत किया गया था।
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बताया कि 3 अगस्त 2024 को भवन की मरम्मत के लिए 11,89,998 रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन मरम्मत का काम अभी तक शुरू नहीं हुआ है। संबंधित विभागों के बीच 82.82 लाख रुपये की एक और राशि के संबंध में आपसी बातचीत चल रही है, लेकिन फिर भी मरम्मत का काम रुका हुआ है। याचिकाकर्ता ने अपनी दलील के समर्थन में तस्वीरें भी पेश कीं, जिनमें इमारत की दयनीय स्थिति दिखाई गई, जिसमें अन्य निवासी भी रह रहे हैं। अदालत ने कहा कि तस्वीरों से पता चलता है कि इमारत की तत्काल मरम्मत की आवश्यकता है। सरकार की ओर से इस मामले में स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए समय मांगा। मामले की अगली सुनवाई 26 सितंबर को होगी।
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