न्यायाधीश सत्येन वैद्य ने अपने निर्णय में कहा कि नियोक्ता की गलती के लिए कर्मचारी को सेवा लाभों से वंचित करना कानूनन गलत है। अदालत ने याचिकाकर्ता प्रेमराज को छह महीने के भीतर सभी सेवा लाभ अदा करने के दिए आदेश दिए हैं।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कर्मचारी को सेवा लाभों से वंचित किए जाने के मामले में अहम निर्णय दिया है। न्यायाधीश सत्येन वैद्य ने अपने निर्णय में कहा कि नियोक्ता की गलती के लिए कर्मचारी को सेवा लाभों से वंचित करना कानूनन गलत है। अदालत ने याचिकाकर्ता प्रेमराज को छह महीने के भीतर सभी सेवा लाभ अदा करने के दिए आदेश दिए हैं। याचिकाकर्ता हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम में वर्ष 1997 में दैनिक वेतन भोगी के तौर पर तैनात हुआ था। एक वर्ष बाद उसको जूनियर ड्राफ्ट्समैन लगाया गया। वर्ष 2000 में उसकी सेवाओं को बर्खास्त किया गया।
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याचिकाकर्ता ने श्रम न्यायालय में चुनौती दी। श्रम न्यायालय ने याचिकाकर्ता को दोबारा सेवा में रखने के आदेश दिए। श्रम न्यायालय ने अपने आदेशों में याचिकाकर्ता को सभी सेवा लाभों का हकदार ठहराया था। लेकिन निगम ने उसे सेवा लाभों से वंचित कर दिया था। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि निगम ने वर्ष 2019 में याचिकाकर्ता को बिना सेवा लाभों के साथ 2009 से नियमित किया था। जबकि श्रम न्यायालय ने उसे सभी सेवा लाभ दिए जाने के आदेश दिए थे। अदालत ने मामले से जुड़े तथ्यों का अवलोकन करने के बाद पाया कि निगम ने गलत तरीके से याचिकाकर्ता को सेवा लाभों से वंचित किया है।