गौरतलब है कि एनजीटी ने शिमला के प्लानिंग एरिया में साढ़े चार मंजिला भवन बनाने के बजाय ढाई मंजिला भवन बनाने के आदेश दिए हैं। कहा गया है कि पहाड़ी इलाका होने के नाते जमीन ज्यादा बोझ उठाने के लायक नहीं है।
उधर, अतिरिक्त मुख्य सचिव (शहरी विकास विभाग) तरुण कपूर ने कहा कि एनजीटी में यह मामला लगा था। इसमें सरकार को जो जजमेंट मिली है, उसमें चार सदस्यीय खंडपीठ की बात कही गई है।
उन्होंने कहा कि जिस दिन विधानसभा में यह सवाल लगा था उसी दिन दोपहर बाद प्रदेश सरकार को लिखित में यह जजमेंट मिली है। अब प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट नहीं जाएगी।