कैग रिपोर्ट के अनुसार 2015-16 और 2016-17 के दौरान विभाग ने 225.916 घनमीटर जब्त की इमारती लकड़ी को विभिन्न डिपुओं में रखा, लेकिन इसका कोई निपटान नहीं किया। इसके चलते 1.18 करोड़ रुपये की लकड़ी सड़ गई।
वन विभाग ने 62 इमारती लकड़ी के लाट्स के दोहन का काम राज्य वन निगम को सौंपा, जिनका पट्टावधि के दौरान दोहन नहीं किया गया, जिसके चलते 29.86 लाख की विस्तार फीस न तो विभाग ने मांगी और न ही निगम ने इसका भुगतान किया।