हिमाचल निर्माता और प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डॉ. वाईएस परमार ने जिस पैतृक घर से कभी सूबे की विकास योजनाओं का खाका बनाया था, आज वो खंडहर में तबदील हो रहा है। भड़योग में बने इस घर की नए सिरे से मरम्मत न हुई तो कभी भी गिर सकता है। डॉ. परमार के घर को संग्रहालय बनाने की घोषणा भी हुई थी, लेकिन इसे बरसों पहले भुला दिया गया।
भड़योग में उनका स्मारक बनाने का सूचना बोर्ड वर्ष 1990 से एक ईंट लगने का इंतजार कर रहा है। 1972 में डॉ. परमार के दूसरे घर चन्हालग गांव के लिए बनाई गई सड़क दो दशकों से पक्की नहीं हो पाई है। नाहन-बागथन सड़क करीब 35 किलोमीटर तक खतरनाक बनी हुई है। इसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है। जबकि 2012 से पूर्व इस विस क्षेत्र से कांग्रेस नेता लगातार सात बार विधायक चुने गए हैं।
फूल मालाएं चढ़ाकर याद है परमार
सियासत या अनदेखी उनके घर या गांव से ही नहीं हुई बल्कि बागथन में 70 के दशक में बनी एकमात्र फ्रूट प्रोसेसिंग यूनिट को पालमपुर स्थानांतरित कर दिया गया। दशकों से यहां कोई नया प्रोजेक्ट नहीं लगा है।
हिमाचल निर्माता डॉ. परमार की 109वीं जयंती मंगलवार को मनाई जाएगी। उनके पैतृक गांव में आधिकारिक रूप से किसी तरह का कार्यक्रम नहीं होता है। हां, कांग्रेस नेता उनकी प्रतिमा पर फूलमाला चढ़ाने जरूर आते हैं।
इस बार डॉ. परमार की जयंती पर उनके दूसरे घर चन्हालग में 4 अगस्त को उनकी प्रतिमा स्थापित होगी। यह प्रतिमा सिरमौर मंच सोलन ने भेंट की है। इसे मां ज्वाला नगर कोटी मंदिर विकास समिति स्थापित करेगी।
संग्रहालय बनाने की घोषणा को भी नेता भूले
कांग्रेस सरकार अपने ही पूर्व नेता को भूल गई है। तभी तो उनकी घोषणाएं आज भी धरी की धरी हैं। इलाके के लोग भी कांग्रेस सरकार के इस रवैये से नाराज है। कुछ लोगों का कहना है कि सरकार को इस दिग्गज नेता को याद करने के साथ साथ उनके अधूरे कामों को भी पूरा करने के बारे में सोचना चाहिए।
पिछले वर्ष मकान के भीतर कुछ मरम्मत करवाई है। इसे पूरी तरह संवारना मुश्किल है। यदि सरकार संग्रहालय बनाने की सोचती है तो उनका परिवार तैयार है। उनका स्मारक बनता तो निश्चित रूप से खुशी होगी। यहां के संपर्क मार्गों की हालत ठीक नहीं है। इस ओर सरकार ध्यान दें। -लव परमार, डा. वाईएस परमार के पुत्र