फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिमाचल चुनाव: शह मात के खेल में धूमल पर भारी पड़े वीरभद्र सिंह

Tue, 19 Dec 2017 01:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
विज्ञापन
विज्ञापन
हिमाचल प्रदेश में भाजपा के कद्दावर नेता माने जाते रहे नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह से शह और मात के खेल में हार गए। इस खेल में वे अपनी ही सीट नहीं बचा पाए। वीरभद्र सिंह ने कभी धूमल के ही करीबी रहे राजेंद्र राणा को ही उनके सियासी कैरियर के खात्मे के लिए तैयार किया। 
विज्ञापन


राजेंद्र राणा पिछली बार सुजानपुर से निर्दलीय चुनाव लड़े तो बाद में वे वीरभद्र सरकार से एसोसिएट हो गए। कांग्रेस के एसोसिएट विधायक रहते हुए उन्होंने सुजानपुर क्षेत्र में विकास कार्यों पर खूब जोर दिया। इसमें वीरभद्र सरकार ने भी उनकी भरपूर मदद की। लोकसभा के आम चुनाव में वर्ष 2014 में वीरभद्र सिंह ने राजेंद्र राणा को कांग्रेस का उम्मीदवार बनाया और उनकी पत्नी को सुजानपुर से उपचुनाव के लिए टिकट दिलाया।

हालांकि, मोदी लहर के बीच दोनों ही चुनाव हार गए। हारने के बावजूद वीरभद्र सिंह पूर्व विधायक राजेंद्र राणा के जमकर काम करते रहे। वीरभद्र सरकार ने सुजानपुर क्षेत्र मेें विकास योजनाओं की उनकी हर मांग को माना। राणा का नाम सुजानपुर क्षेत्र में गरीब युवतियों के विवाह में बहुत अधिक योगदान देने और अन्य सामाजिक कार्यों में भी खूब मशहूर है।
विज्ञापन


वीरभद्र सिंह ने उन्हें कांग्रेस का टिकट दिलाकर ऐसा फिट किया कि उन्होंने भाजपा के सीएम पद के उम्मीदवार धूमल को ही हरा दिया। इस तरह से धूमल वीरभद्र से मात खा गए, जबकि अर्की में भाजपा ने नया उम्मीदवार दिया तो इससे अपने लिए बहुत कम प्रचार के बावजूद सीएम चुनाव जीत गए।

कंवर ने रखा धूमल के लिए अपनी सीट छोड़ने का प्रस्ताव

ऊना। कुटलैहड़ से लगातार चौथी बार जीत दर्ज कर विधानसभा पहुंचे विधायक वीरेंद्र कंवर ने पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल के लिए अपनी सीट तक छोड़ने का प्रस्ताव रख दिया है। उन्होंने कहा कि धूमल प्रदेश में भाजपा के सीएम उम्मीदवार रहे हैं।

प्रदेश में भाजपा की जीत उनके नाम के एलान के बाद पक्की हुई है। ऐसे में यदि हाईकमान धूमल को प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद देती है तो वह उनके लिए अपनी सीट खाली करने के लिए तैयार हैं। कंवर ने कहा कि धूमल के बिना यह जीत फीकी है।

पार्टी हाईकमान धूमल को प्रदेश के मुख्यमंत्री का पद देती है तो वह उनके लिए कुटलैहड़ की सीट खाली करने के लिए तैयार है। वीरेंद्र कंवर धूमल के नेतृत्व वाली पिछली सरकार में सीपीएस रहे थे। उन्हें प्रेम कुमार धूमल का करीबी भी माना जाता है।
विज्ञापन

बड़का जी धूमल साहबे दा क्या बणया, किने वोटां ते राणा अगे

बड़का जी धूमल साहबे दा क्या बणया? राणा किने वोटां ते अगे है? यह एक ऐसा सवाल था, जो सोमवार सुबह से लेकर दोपहर तक अधिकांश भाजपा समर्थकों के जुबान पर रहा। चुनाव नतीजे जानने के लिए धूमल समर्थक दिनभर एक-दूसरे से यही पूछते रहे। राजेंद्र राणा की बढ़ती लीड से जहां भाजपाई चिंतित दिखे, वहीं कुछ धूमल समर्थक बीच-बीच में भगवान को भी याद करते रहे।

सोमवार को भाजपा मुख्यालय दीपकमल से लेकर रिज मैदान तक अधिकांश समर्थक भाजपा की जीत से ज्यादा धूमल के मतों की जानकारियां जुटाने में व्यस्त रहे। सचिवालय के कुछ अफसर भी दीपकमल में मौजूद अपने खास लोगों से अपडेट लेते रहे। लोअर हिमाचल की पहाड़ी भाषा में समर्थक एक-दूसरे से बात करते हुए सुनते गए कि धूमल साहब नी हारने चाहिदे, भोंए लीड घट ही होवे।

मुख्यमंत्रिये दा हारना, अहां खातर बड़िया शर्मा दी गल्ल है। समर्थक यह भी कहते सुने गए कि जिस राणे जो धूमल साहब राजनीति च लेई ने आए थे, तिने ही अज एह दिन दखाई ता। इसते खरा तां ऐ ही हुंदा कि धूमल साहब राणे जो राजनीति दे सारे गुर नी सिखांदे। उधर, दोपहर बाद जैसे ही धूमल के हारने की घोषणा हुई तो समर्थक मायूस होकर पार्टी दफ्तर से तितर बितर होना शुरू हो गए।

हारी तां बेशक गया, फिर भी सीएम तां बणी जाणा
कई समर्थक कहते हुए सुने गए कि धूमल साहब हारी तां बेशक गए, फिर भी सीएम तां बणी जाणे। जे सेंटर च जेटली हारी कने मंत्री बणी सकदे तां धूमल साहब भी सीएम बणी सकदे। इसके लिए समर्थकों ने तर्क दिया कि हिमाचल में विधानसभा चुनाव धूमल के नाम पर लड़ा गया। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को मुख्यमंत्री के लिए धूमल के नाम पर फैसला लेना चाहिए।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें