हिमाचल विधानसभा चुनाव की घोषणा के बाद प्रचार में उतर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने दोहरी चुनौती रहेगी। प्रेम कुमार धूमल के मुख्यमंत्री चेहरा घोषित होने से यह देखना होगा कि मोदी किस तरह से धूमल की ब्राडिंग करते हैं।
आखिरी समय में धूमल को फ्रंट पर लाने की रणनीति पर भी उनकी ओर से जवाब आ सकता है। पार्टी की आंतरिक रणनीति का खुलासा भले मोदी न करें, लेकिन यह देखना अहम रहेगा कि इस दांव को किस तरह से भुनाते हैं।
साथ ही कांग्रेस के उठाए कई सवालों का भी मोदी से जवाब मिलने का इंतजार है। भाजपा के साथ अब धूमल के पक्ष में मोदी का प्रचार कितना कामयाब होता है, इस पर पार्टी के सियासी समीकरण टिके हैं। चुनाव के लिहाज से भाजपा के लिए तीन दिनों में मोदी की ताबड़तोड़ सात जनसभाएं बेहद अहम मानी जा रही हैं।
पीएम मोदी एक बार फिर हिमाचल आ रहे हैं, लेकिन अब सियासी हालात पहले से नहीं हैं। चुनावी दंगल सज चुका है, सभी दलों के प्रत्याशी एक-दूसरे को धोबीपछाड़ लगाने का दांव चलने को बेताब हैं।
वीरभद्र की टक्कर में धूमल
कांग्रेस के सीएम वीरभद्र की टक्कर में अब भाजपा ने नेता प्रतिपक्ष धूमल को उतार दिया है। प्रधानमंत्री के कार्यक्रम पहले से तय हैं, लेकिन तब किसी को भनक तक नहीं थी कि पार्टी मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित कर देगी। प्रचार मोदी चेहरे के इर्द-गिर्द ही धूम रहा था।
कांगड़ा के रैत क्षेत्र से मोदी प्रचार अभियान की शुरुआत कर रहे हैं। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने से ठीक पहले बिलासपुर में प्रधानमंत्री ने धूमल का जिक्र तक नहीं किया था।
अब रैत पहुंचकर मोदी को न केवल बगावत से जूझ रहे कांगड़ा जिले में पार्टी की स्थिति मजबूत करनी है, बल्कि धूमल का जिक्र करने के साथ उनकी कद बढ़ाने की फिक्र करनी पड़ेगी।
धूमल को मुख्यमंत्री प्रत्याशी घोषित करने के बाद प्रदेश में सियासी समीकरण कैसे बदले हैं, इसका जवाब भी मोदी से मिल सकता है। मोदी कांगड़ा पहुंचकर धूमल के नाम पर क्या संदेश देते हैं, इसपर सबकी नजर है।
कांगड़ा पर मोदी का सर्वाधिक फोकस
इसके अलावा विरोधियों के सियासी दांव पेच का तोड़ निकाल कर भाजपा के पक्ष में हवा बांधनी होगी। मोदी की जनसभा में यह भी देखना अहम रहेगी कि सीएम वीरभद्र और कांग्रेस को किन मुद्दों पर घेरते हैं।
प्रधानमंत्री की प्रदेश में सात चुनावी जनसभाओं से तीन कांगड़ा जिले में हैं। दो जनसभाएं फतेहपुर और पालमपुर में हैं, जहां टिकट कटने से निर्दलीय उतरे बागियों से त्रिकोणीय समीकरण बनते दिख रहे हैं।
शाहपुर में तीसरी जनसभा है, जहां पार्टी लगातार जीत रही है। वर्ष 2012 में कांगड़ा से भाजपा के खाते में 15 में से तीन सीटें आईं। पिछली बार भी खेमेबाजी की वजह से पार्टी कई सीटों पर हारी, जिसके लिए पार्टी ने मोदी चेहरे को आगे रखने के बाद अब धूमल को सीएम घोषित कर वहां अपने पक्ष में हवा बनाने का दांव खेला है।