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इन्वेस्टर मीट से पहले महंगा हुआ धर्मशाला-दिल्ली का हवाई सफर

Sat, 02 Nov 2019 10:21 AM IST
अरविन्द ठाकुर विपिन चौधरी, अमर उजाला, धर्मशाला
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सात और आठ नवंबर को होने वाली इन्वेस्टर मीट ने धर्मशाला-दिल्ली का हवाई सफर महंगा कर दिया है। ऑफ सीजन में चार हजार रुपये में मिलने वाली टिकट के अब 21 हजार रुपये से अधिक चुकाने पड़ रहे हैं।

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मीट के दौरान सात नवंबर को दिल्ली से धर्मशाला आने वाली स्पाइस जेट की उड़ान पहले ही पैक है, जबकि एयर इंडिया में सीट के 21 हजार रुपये दाम चुकाने होंगे। दो नवंबर को स्पाइसजेट की फ्लाइट में 13881 और एयर इंडिया में 21373, तीन नवंबर को भी 21373, चार नवंबर को स्पाइस जेट की टिकट 7949 और एयर इंडिया की टिकट 10,243 से 12,763 रुपये, जबकि पांच नवंबर को स्पाइस जेट की उड़ान में 13882, तो एयर इंडिया की उड़ान में 12,763 से 17,698 रुपये यात्रियों को चुकाने होंगे।

वहीं इन्वेस्टर मीट से एक दिन पहले स्पाइस जेट की उड़ान में 20077, तो एयर इंडिया की उड़ान में 21373 रुपये यात्रियों को खर्च करने होंगे। आठ नवंबर को स्पाइस जेट में 9261 तो एयर इंडिया की फ्लाइट में 6831 से लेकर 10243 रुपये किराया देना होगा। हालांकि यह किराया कम व ज्यादा भी हो सकता है। गगल एयरपोर्ट के मैनेजर मिलन गुरंग का कहना है कि हवाई सफर की टिकटों को महंगे व सस्ते दामों पर विक्रय करना मांग के अनुसार होता है।

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इन्वेस्टर मीट को केंद्र सरकार ने पांच करोड़ रुपये और दिए

धर्मशाला में सात और आठ नवंबर को होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर मीट के लिए केंद्र सरकार ने पांच करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जारी की है। अभी तक कुल 10 करोड़ की राशि जारी की गई है। हिमाचल सरकार को इस राशि का उपयोगिता प्रमाणपत्र देना होगा। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्रीज एंड इंटरनल ट्रेड (डीपीआईआईटी) की निदेशक श्रुति सिंह ने इस बाबत मुख्य सचिव डॉ. श्रीकांत बाल्दी को पत्र भेजा है। इन्वेस्टर मीट के लिए विभाग ने 5 करोड़ की अतिरिक्त राशि स्वीकृत की है।

इससे तय नियमों के अनुसार, लेआउट और इन्वेस्टर मीट की प्लानिंग, समारोह स्थल में ढांचा खड़ा करने, एक हजार मेहमानों के परिवहन, रहने-खाने की व्यवस्था और प्रमोशन के लिए लिखित सामग्री जुटाई जानी है। इस राशि को खर्च करने के लिए केंद्र सरकार ने शर्तें लागू की हैं। इनके दायरे में रहकर ही विभिन्न मदों पर राशि व्यय की जा सकती है। किसी भी मद में राशि व्यय करने को पारदर्शिता अपनानी होगी।

यह राशि खर्च करने के साथ सरकार की उपयोगिता प्रमाणपत्र भी केंद्र सरकार को उपलब्ध कराना होगा। सरकार इन्वेस्टर मीट के आयोजन के लिए जिस एजेंसी की सेवाएं ले रही है, उसके बैंक खाते का विस्तृत ब्योरा भी उपलब्ध करवाना होगा। 
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