न्यायालय ने प्रतिवादियों के आवेदन को कानूनी तौर पर ठीक नहीं पाया। न्यायालय के अनुसार ड्राफ्ट रूल्स के तहत उनका हक जायज नहीं है। दूसरे वह 5 बीघा जमीन पर काबिज हैं, जबकि उनकी अपनी जमीन 5 बीघा से कहीं अधिक है।इसके अलावा नियमों के मुताबिक राजस्व नियमों में बनाए अन्य प्रावधानों का भी अवलोकन किया जाना जरूरी है।
न्यायालय ने पाया कि 5 बीघा तक अधिकतम सरकारी जमीन पर कब्जा किया जा सकता है। लेकिन यह जमीन अपनी निजी जमीन को मिलाकर 10 बीघा से अधिक नहीं होनी चाहिए। अगर होगी तो अतिरिक्त भूमि छोड़नी पड़ेगी। यानी जिसके पास पहले ही अपनी जमीन 10 बीघा से अधिक है, वह रूल्स के मुताबिक सरकारी जमीन को अपने कब्जे में हस्तांतरित करने का हक नहीं रखता है।