पति की हत्या के जुर्म में आजीवन कारावास की सजा भुगत रही ज्योति बाला को हाईकोर्ट ने दोष मुक्त करार करते हुए बरी कर दिया है। न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने प्रार्थी ज्योति बाला को तुरंत रिहा करने के आदेश दिए हैं। इसी जुर्म के आरोपी सुखदेव उर्फ सोनू को भी अदालत ने रिहा करने के आदेश दिए हैं। दोनों आरोपी करीब चार साल से जेल में बंद थे।
याचिका में दिए तथ्यों के अनुसार ऊना जिले के हरोली का वेद प्रकाश मजदूरी करता था। वर्ष 2011 में उसकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उसके तीन बच्चे हैं। शिकायतकर्ता जगजीवन राम ने हरोली पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज करवाई कि उसके भाई को ज्योति बाला और उसके साथी ने मारा है।
शिकायतकर्ता के अनुसार तथ्यों को गुमराह करने के इरादे से ज्योति बाला ने यह बयान दिया कि उसके पति की मौत अधिक मात्रा में शराब पीने से हुई है। जांच के दौरान पुलिस ने ज्योति बाला और सुखदेव को हिरासत में लिया और दोनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया गया।
दोनों के खिलाफ सत्र न्यायाधीश ऊना की अदालत में अभियोग चलाया गया। दोनों पर अभियोग साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने 28 गवाह पेश किए। निचली अदालत ने दोनों आरोपिओं को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस निर्णय के खिलाफ दोनों आरोपिओं ने हाईकोर्ट के समक्ष अपील के माध्यम से चुनौती दी। हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड के अवलोकन के बाद पाया कि अभियोजन पक्ष दोनों के खिलाफ अभियोग साबित करने में नाकाम रहा है।