डॉ. विजय सिंह ठाकुर, पूर्व कुलपति, बागवानी विश्वविद्यालय नौणी
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पक जाने के बाद सेब का तुड़ान नहीं रोका जा सकता। मैच्योरिटी के बाद तुड़ान न होने से सेब का ग्लूकोज सोरबिटॉल में बदल जाता है, जिससे सेब खाने योग्य नहीं रहता। ओवर मैच्योर होने पर सेब गलना शुरू हो जाता है और खुद ही पेड़ से झड़ जाता है। फूल से फल बनने के बाद सेब तैयार होने की प्रक्रिया 120 दिन चलती है। इसके बाद इसे इस्तेमाल करना होता है। एक हफ्ते भी अगर सेब को सामान्य तापमान में होल्ड किया जाए तो यह खराब होना शुरू हो जाता है।
- डॉ. विजय सिंह ठाकुर, पूर्व कुलपति, बागवानी विश्वविद्यालय नौणी