परियोजना को लेकर अन्य सभी औपचारिकताएं पहले ही पूरी कर ली गई हैं। सिरमौर जिले के बीचोंबीच बहने वाली गिरि नदी में 148 मीटर ऊंचे रेणुका बांध के निर्माण से दिल्ली समेत अन्य पड़ोसी राज्यों की प्यास बुझेगी।
करीब 1508 हेक्टेयर भूमि में बनने वाली रेणुका बांध परियोजना में 948 हेक्टेयर निजी भूमि बांध की भेंट चढ़ेगी। क्षेत्र के 1146 परिवारों को विस्थापन का दंश झेलना पड़ेगा। विस्थापितों को सिरमौर जिले में ही पुनर्वास के लिए जमीन का चयन किया गया है।
परियोजना में 40 मेगावाट बिजली पैदा होगी। बिजली परियोजना प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड बनाएगी। दिल्ली सरकार बिजली घटक की 90 प्रतिशत लागत वहन करेगी। हिमाचल को केवल 0.30 प्रति यूनिट की दर से करीब 200 मिलियन यूनिट बिजली मिलेगी।
इससे कॉरपोरेशन को हर साल 60 करोड़ का शुद्ध राजस्व प्राप्त होगा। प्रथम वर्ष में राज्य सरकार को 12 करोड़ का राजस्व प्राप्त होगा। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बताया कि परियोजना से 49800 हेक्टेयर मीटर बीसीएम पानी का भंडारण होगा। दिल्ली को 23 क्यूसेक की जलापूर्ति होगी।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने बताया कि परियोजना के सिंचाई/पेयजल घटक की 90 प्रतिशत लागत यानी 3892.83 करोड़ रुपये केंद्र सरकार वहन करेगी, जबकि 10 प्रतिशत यानी 432.54 करोड़ रुपयों में हरियाणा 47.82 प्रतिशत, यूपी और उत्तराखंड 33.65 प्रतिशत, हिमाचल 3.15 प्रतिशत, राजस्थान 9.34 प्रतिशत और दिल्ली 6.04 प्रतिशत खर्च करेंगे। परियोजना को भूमि अधिग्रहण के लिए केंद्र ने 446.96 करोड़, दिल्ली सरकार ने 214.84 करोड़ और हरियाणा सरकार ने अब तक 25 करोड़ रुपये जारी कर दिए हैं।
1982 में शुरू हुई थी कवायद
बांध के निर्माण की कवायद 1982 को तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी ने की थी। कई दशकों से सिरमौर के लोग भी इस बांध का निर्माण कार्य पूरा होने की राह ताक रहे हैं। केंद्रीय जल संशाधन मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि यह समझौता ऐतिहासिक है। शीघ्र ही कैबिनेट से इसकी मंजूरी लेने का प्रयास करेंगे। यमुना नदी पर किसाऊ परियोजना पर भी जल्द एमओयू होगा।