इजराइली अन्ना किस्म का सेब जून में पककर तैयार हो जाएगा।
फ्रांस का सेब प्रदेश के निचले क्षेत्र के बागवानों की आर्थिकी सुधारेगा। फ्रांस से आयातित इजराइली अन्ना किस्म का सेब जून माह में ही बाजार में दस्तक देगा। प्रदेश के बागवानी विभाग ने इस किस्म को विकसित कर लिया है। सेब की इस किस्म की खास बात यह है कि यह जून में पककर तैयार हो जाती है।
आमतौर पर हिमाचली सेब 15 जुलाई के बाद बाजार में बिकना शुरू होता है। अब इजराइली अन्ना किस्म का सेब जून में पककर तैयार हो जाएगा। प्रदेश बागवानी विभाग ने वर्ष 2013 में गर्म इलाके के अन्ना प्रजाति के छह सेब पौधे फ्रांस से आयातित किए थे। इन्हें फलादायन केंद्र पिंगला में विकसित किया।
गत वर्ष कर्मचारियों ने छह पौधों में सफल रूप से फसल तैयार की। जब इन पौधों को विभाग ने आयात किया था, तब पौधों की उम्र एक वर्ष थी। दो वर्ष तक पौधों को विकसित करने के बाद गत वर्ष बागवानी विभाग ने सभी पौधों से सफल रूप से फल लिए हैं।
इस वर्ष भी फलदायन केंद्र में अन्ना प्रजाति के सेब पौधे फ्लावरिंग से लद गए हैं। विभाग ने सेब की सफलता को देखते हुए इसके दो हजार पौधों को तैयार कर निचले गर्म इलाकों के बागवानों को वितरित किया है।
चार नहीं तीन वर्ष में फल देगी यह प्रजाति- हिमाचल में सेब के पौधे चार वर्ष के बाद फल देना शुरू करते हैं, लेकिन इजराईली ओरिजन की अन्ना प्रजाति का यह सेब महज तीन वर्ष में ही फल देना शुरू कर देगा। इससे प्रदेश के निचले गर्म इलाकों के बागवानों की आर्थिकी सुदृढ़ होगी।
बागवानी विभाग मंडी के उपनिदेशक वीके धीमान ने बताया कि फ्रांस से इजराइली ओरिजन के सेब को सफल रूप से फलदायन केंद्र पिंगला में विकसित किया गया है। प्रदेश के निचले गर्म इलाके के बागवानों को दो हजार इजराइली अन्ना सेब के पौधे वितरित किए हैं।