इस वजह से फटते हैं बादल
इसके अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली अधिकांश घटनाएं क्यूम्यलोनिम्बस या गरज वाले बादलों से जुड़ी होती हैं। इन घटनाओं में बहुत कम समय में एक स्थान में 200 से 1000 मिलीमीटर प्रति घंटे में बारिश होती है। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान हमीरपुर के स्नातकोत्तर पावस पटेल और एसोसिएट प्रो. चंद्र प्रकाश ने कहा कि बादल फटने की घटनाओं पर आईआईटी रुड़की ने शोध किया है। शोध के अनुसार खड़ी पहाड़ियों के रूप में भौतिक अवरोध क्यूम्यलोनिम्बस बादलों के निर्माण में योगदान करते हैं। इससे बादल फटते हैं।
ऐसे बनते हैं क्यूम्यलोनिम्बस बादल
बादल फटने के निर्माण में तापमान प्रमुख कारक है। दिन के समय सौर ताप के कारण पृथ्वी की सतह तेजी से गर्म होती है। इस ताप के कारण वायुमंडल अस्थिर हो जाता है। इससे गर्म हवा तेजी से ऊपर उठती है। जैसे-जैसे हवा ऊपर उठती है, वह ठंडी होकर संघनित हो जाती हैं, जिससे विशाल क्यूम्यलोनिम्बस बादल बनते हैं।