हिमाचल के सेब उत्पादकों को समय पर कृषि उपकरणों पर सब्सिडी नहीं मिल रही है। सेब की फसल को ओलावृष्टि से बचाने में उपयोगी एंटीहेल नेट और पावर स्प्रेयर्स पर उपदान समय पर नहीं मिल पा रहा है, जबकि इसके लिए लाखों रुपएका बजट रखा गया है। सूचना का अधिकार के तहत प्रदेश के बागवानी विभाग की दी सूचना में यह बात सामने आई है।
बागवानी विभाग ने सूचना दी है कि प्रदेश में सबसे ज्यादा सेब उत्पादन करने वाले जिला शिमला में वर्ष 2014 तक कुल 3000 बागवानों ने एंटीहेल नेट के लिए आवेदन किया था, लेकिन अभी तक 1459 बागवानों को ये नेट उपलब्ध नहीं कराए जा सके हैं। अभी तक कुल 1541 बागवानों को ही एंटीहेल नेट दिए जा सके हैं। जिले में एंटीहेल नेट की सब्सिडी के कुल 2556 मामले लंबित हैं।
बागवानी ब्लॉक ठियोग में एंटीहेल नेट की सब्सिडी के लंबित मामलों की संख्या 734 है। ठियोग में सब्सिडी के लिए 87,02,500 रुपये का बजट आया था, लेकिन इसमें 26,16,845 रुपये खर्च नहीं हुए। पॉवर स्प्रेयर्स उपदान के लिए 6814 बागवानों ने आवेदन किया था और अभी तक 2532 बागवानों को यह उपकरण नहीं मिला है। पावर टिलर उपदान को साल 2014 तक 2120 बागवानों ने आवेदन किया था और अभी तक 804 मामले लंबित हैं।
ब्रश और ग्रास कट्टर को 257 बागवानों ने आवेदन किया और 143 मामले लटके हैं। टुल्लू पंप उपदान को 21 बागवानों ने आवेदन किया, लेकिन 15 बागवान पंपों के लिए इंतजार में हैं। हैरानी की बात यह है कि वर्ष 2018-19 में एंटीहेल नेट उपदान के लिए कुल 852.04 लाख रुपये मिले। इसमें 103.55 लाख का बजट सरकार खर्च नहीं कर पाई है।