आढ़तियों और लदानियों की ओर से किसानों को कहा जा रहा है कि इसका कारण अधिक फसल है। मगर आढ़तों से थोड़ी ही दूरी पर परचून की दुकानें देखी जाएं तो वहां मटर खूब महंगा बिक रहा है।
शिमला के पलाना गांव के किसान संदीप शर्मा का कहना है कि उनके पास मटर की अच्छी पैदावार है, मगर बाजार में अच्छे रेट नहीं मिल पाने के कारण वह इसकी तुड़ाई ही नहीं कर पा रहे हैं।
ढली सब्जी मंडी में मटर 15 से 20 रुपये प्रति किलो भी रेट हैं। बहाना बढ़िया और कम बढ़िया मटर का है। संदीप शर्मा का आरोप है कि इसी मटर को उपभोक्ताओं को 60 रुपये तक बेचा जा रहा है।
मंडियों में किसानों से खरीदे जा रहे और परचून में बेचे जा रहे मटर के रेट में इतना फर्क क्यों है। इसकी जांच की जाएगी। किसानों से अगर किसी तरह की धोखाधड़ी हो रही है तो इस पर कार्रवाई होगी। वरिष्ठ मार्केटिंग अधिकारी को पूरी जांच-पड़ताल के लि फील्ड में भेजा जाएगा। - आरके कौंडल, प्रबंध निदेशक, हिमाचल प्रदेश कृषि उपज मार्केटिंग बोर्ड, हिमाचल प्रदेश।