फाल्गुन संक्रांति शुरू होते ही हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू में पारंपरिक उत्सव फागली भी शुरू हो गया है। जिले के बाह्य सराज के साथ बंजार, मलाणा, तीर्थन वैली, सैंज, मणिकर्ण, लगवैली तथा ऊझी घाटी में महीनेभर उत्सव की धूम रहेगी। इन दिनों बंजार की तीर्थन घाटी में फागली उत्सव में मुखौटा नृत्य सबको आकर्षित कर रहा है। तीर्थन के शरची गांव में स्थानीय लोगों ने मुंह में मुखौटे पहनकर नृत्य किया और आसुरी शक्तियों को भगाया। तीर्थन घाटी के विभिन्न गांवों में 13 से 15 फरवरी तक फागली उत्सव मनाया जा रहा है। फागली उत्सव में गांव के चयनित लोग मुखौटा नृत्य कर गांव से आसुरी शक्तियों को भगाया जाता है। इससे पूरे साल भर गांव एवं क्षेत्र में सुख और समृद्धि बनी रहती है। तीर्थन घाटी के गांव शरची के साथ पेखड़ी, नाहीं, तिंदर, डिंगचा, फरियाडी, बशीर और कलवारी आदि गांवों में पारंपरिक फागली उत्सव मनाया जा रहा है।
तीर्थन घाटी में सैर सपाटे के लिए पहुंचे पर्यटक भी प्राचीनतम मुखौटा नृत्य का आनंद ले रहे हैं। वे इस संस्कृति को अपने कैमरों और मोबाइल में कैद कर रहे हैं। 13 फरवरी की शाम को पहले दिन छोटी फागली मनाई गई, जिसमें एक सीमित क्षेत्र तक ही नृत्य एवं परिक्रमा की जाती है। दूसरे दिन बड़ी फागली का आयोजन होता है। इसमें मुखौटे पहने हुए मंदयाले गांव के हर घर में प्रवेश करके सुख समृद्धि का आशीर्वाद देते है। इस दिन पूरे गांव में एक विशेष व्यंजन चिलड़ू परोसा जाता है। शाम के समय देवता के मैदान में महिला-पुरुष की संयुक्त नाटी का आयोजन हुआ। फागली के अंतिम दिन देवता की पूजा अर्चना के पश्चात देवता के गूर के माध्यम से भूत-प्रेत और बुरी आत्माओं को गांव से बाहर भगाने की परंपरा निभाई जाती है। इस दौरान अश्लील जुमले भी बोले जाते हैं।
देव पीऊली नाग ने की बटाहर गांव की परिक्रमा
उधर, ऊझी घाटी के बटाहर गांव में भी फागली उत्सव मनाया गया। परंपरा के अनुसार फाल्गुन संक्रांति के दिन सोमवार को देवता पीऊली नाग का रथ सजाया गया। देव विधिविधान से देवता की पूजा-अर्चना की गई। देवता अपने हारियान क्षेत्र बटाहर गांव की परिक्रमा पर निकले। देवता ने घर-घर जाकर हारियानों को आशीर्वाद दिया। हारियानों ने अपने आराध्य देव पीऊली नाग का फूल-मालाओं से स्वागत किया। बटाहर गांव में पूरा दिन पूजा-अर्चना का दौर चलता रहा। देवता के कारदार अजीत ठाकुर ने कहा कि 18 नाग देवताओं में पीऊली नाग का फागली पर्व सबसे पहले मनाया जाता है। इसके बाद ही अन्य नागों का फागली उत्सव मनाया जाएगा। कहा कि इस बार भी फाल्गुन संक्रांति के दिन देवता के सम्मान में फागली उत्सव मनाया गया। हारियान क्षेत्र के अलावा अन्य जगहों से भी श्रद्धालु देवता पीऊली नाग के दर्शन के लिए पहुंचे। उधर, पुजारी उत्तम ने कहा कि फागली उत्सव के दिन ही आगामी एक साल के लिए देवता के मुख्य कारकून भी चुने गए हैं।