भारतीय पूर्व सैनिक लीग के राज्य अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने धर्मशाला में प्रेस वार्ता में कहा कि बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा को विश्व शांति के लिए किए गए उत्कृष्ठ कार्यों को ध्यान में रखते हुए अंतरराष्ट्रीय गांधी शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। धर्मशाला में नवंबर महीने में अंतरराष्ट्रीय निवेशक सम्मेलन से सरकार क्षेत्र को विश्व भर में पहचान मिलने का दावा कर रही है, जबकि बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा के कारण पहले ही धर्मशाला को विश्व स्तर पर पहचान मिल चुकी है। हालांकि, राजनीतिक दलों ने इस क्षेत्र की हमेशा अनदेखी की है।
नरेंद्र मोदी सरकार इस साल को महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के रूप में उत्सव की तरह मना रही है। ऐसे में विश्व में शांति का संदेश देने बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा को अंतरराष्ट्रीय गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित करने की प्रधानमंत्री को घोषणा करनी चाहिए। नवंबर माह में निवेशक सम्मेलन में आने या इससे पहले प्रधानमंत्री इसकी घोषणा करें। मनकोटिया ने कहा कि धर्मशाला को विश्व स्तर पर ख्याति देने के लिए बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा को निवेशक सम्मेलन में विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर को मांग पत्र भेजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन के दबाव में अब तक बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा को अब तक भारत में जो सम्मान मिलना चाहिए था, वह नहीं मिल सका है। पूर्व में दलाई लामा को भारत रत्न की मांग उठी थी, लेकिन सिरे नहीं चढ़ पाई।
पुरानी गलतियों को सुधारा: मनकोटिया
पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने भी माना है कि अनुच्छेद 370 कांग्रेस की गलती थी। मंगलवार को उन्होंने प्रेस वार्ता में कहा कि पीएम मोदी ने पुरानी गलती को सुधारकर 370 को हटाने का साहसिक फैसला लिया है। पीएम मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि उनमें साहसिक फैसले लेने की हिम्मत है।