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तिब्बत के पूर्व पीएम का चीन को करारा जवाब

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नवनिर्वाचित मोदी सरकार और चीन के बीच चल रही वार्ता के समय चीन की ओर से जारी किया नया नक्शा अथेंटिक नहीं है। नए नक्शे में चीन ने अरुणाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर के कुछ भूभाग को अपना दर्शाया है।
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यह एलओएसी (लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल) का उल्लंघन है। हिमाचल स्थित मैकलोडगंज में अपने निवास स्थान पर एक विशेष वार्ता में निर्वासित तिब्बत सरकार के पूर्व प्रधानमंत्री सामदोंग रिंपोछे ने कहा कि भारत और चीन के बीच जब भी कोई वार्ता शुरू होती है तब तब चीन इस तरह के हथकंडे अपनाकर मनोवैज्ञानिक रूप से दबाव बनाने की कोशिश करता है।

सीमा को लेकर करना होगा फैसला

रिंपोछे ने कहा कि देशों की सीमा रेखा के मुद्दे निर्धारित करना आसान काम नहीं होता ह्रै। शिमला समझौते के तहत भारत अपने भूभाग पर दावा करता है। शिमला समझौता तिब्बतियन और ब्रिटिश इंडिया के बीच 1914 में हुआ था।

अगर चीन इस समझौते को मानता है तो उसको तिब्बत की स्वायत्तता माननी पड़ेगी। अगर वह इस बात को नहीं मानता है तो उसे पुराना नक्शा दिखाना चाहिए जो 1914 से पहले की स्थिति दिखाता है। सीमा के भूभागों की स्थिति ऐसे ही चलती रहेगी जब तक दोनों देशों में कोई फैसला नहीं हो जाता।
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मोदी ला सकते हैं बदलाव

पूर्व पीएम ने कहा कि जहां तक मेरी मेरी समझ है चीन में जब से नई सरकार बनी है तब से चीन के भारत सरकार के साथ संबंध बेहतर हो रहे हैं। मुख्य रूप से जब से भारत में नई सरकार बनी है दोनों ही देश संबंधों की स्थिति को सामान्य करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।

हम इसका स्वागत करते हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि दोनों देशों के संबंधों में सुधार आएगा। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति जी पिंग दोनों देशों के संबंधों में नया बदलाव लेकर आएंगे।
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