प्रदेश में अब वरिष्ठता सूची में शामिल प्रधानाचार्य ही शिक्षा विभाग में उपनिदेशक बन सकेंगे। प्रदेश के विभिन्न जिलों में शिक्षा उपनिदेशक का कार्यभार संभाल रहे कनिष्ठ प्रधानाचार्यों को अब शिक्षा उपनिदेशक के पद से हटना पड़ेगा। प्रदेश शिक्षा विभाग के सचिव ने प्रदेश उच्च न्यायालय में विचाराधीन मामले के बाद इस संदर्भ में शिक्षा निदेशक को आदेश जारी करते हुए इन आदेशों की सख्ती से अनुपालना करने के लिए कहा है। प्रदेश भर के सभी जिलों में शिक्षा उपनिदेशक प्रारंभिक, शिक्षा उपनिदेशक उच्चतर, शिक्षा उपनिदेशक निरीक्षण विंग पर स्कूल प्रधानाचार्यों को नियुक्ति दी गई है।
इस मनमाने रवैये से सीनियर प्रधानाचार्यों को अपने जूनियर के अधीन काम करना पड़ रहा है। उच्च न्यायालय ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सितंबर 2022 में प्रदेश में शिक्षा उपनिदेशकों की नियुक्ति पर रोक लगा दी थी। वहीं इस मामले में शिक्षा विभाग से भी जवाबतलब किया गया। 15 सितंबर 2023 को प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायाधीश सतेन वैद्य की अदालत ने इस मामले की सुनवाई डबल बैंच में करने की सिफारिश की।
अब 13 दिसंबर 2023 को इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रामचंद्रा राव और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत में होगी। वहीं इस मामले की अगली सुनवाई से पूर्व ही अब शिक्षा सचिव ने शिक्षा निदेशक को प्रधानाचार्य के पद से शिक्षा उपनिदेशक के पद पर की जाने वाली पदोन्नति पर वरिष्ठतम प्रधानाचार्यों को नियुक्त करने के आदेश जारी किए हैं। विभाग के अवर सचिव अनिल कुमार ने इस बारे में आदेश जारी किए हैं।
एक साल से कम समयावधि वाले प्रधानाचार्य संभाल रहे कार्यभार
प्रदेश के कई जिलों में प्रारंभिक शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा और शिक्षा निरीक्षण विंग में ऐसे स्कूल प्रधानाचार्यों को नियुक्त किया गया है, जिनका बतौर प्रधानाचार्य का कार्यकाल एक साल से भी कम है। वहीं कुछ ऐसे भी प्रधानाचार्य हैं, जिन्हें बतौर प्रधानाचार्य सेवाएं देते हुए 12 वर्ष से भी अधिक का समय बीत चुका है।