हिमाचल के दो कारोबारियों ज्ञान चंद और संजय धीमान को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मुख्यालय ने अवैध खनन से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया है। इन पर हिमाचल प्रदेश में ब्यास नदी और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में यमुना नदी में अवैध खनन कर करोड़ों की आय अर्जित करने के आरोप हैं। दोनों को विशेष न्यायालय (पीएमएलए) गाजियाबाद के समक्ष मंगलवार को पेश किया। बताया जा रहा है कि एक आरोपी ने 1.80 करोड़ नकद देकर सहारनपुर में गढ़वाल स्टोन क्रेशर खरीदा है, जहां अवैध खनन के आरोप लगे हैं।
मामले में आरोपियों से पूछताछ में कई बड़े खुलासे होने और गिरफ्तारियां होने की आशंका है। ईडी के मुताबिक, उन्हें औपचारिक शिकायतें और खुफिया सूचनाएं मिली थीं, जिनमें आरोप है कि ज्ञान चंद सहित कई खनन माफिया ब्यास नदी के तट पर अवैध रेत और खनिज खनन का काम कर रहे हैं। ईडी ने इस मामले में कांगड़ा और ऊना जिलों के विभिन्न पुलिस थानों में दर्ज छह एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। एक केस सहारनपुर में दर्ज है। एफआईआर में आरोप है कि सरकारी जमीन पर अवैध खनन गतिविधियां हो रही हैं और प्रदेश के ऊना और कांगड़ा जिलों में टिपर, पोकलेन, जेसीबी और ट्रैक्टर अवैध खनन में लगे हैं। ये लोग खनिजों को वाहनों द्वारा अवैध रूप से स्टोन क्रशर तक पहुंचा रहे थे।
ज्ञान चंद और अन्य के खिलाफ आईपीसी, 1860, सार्वजनिक संपत्ति अधिनियम, 1984 और खान और खनिज (विनियमन और विकास) अधिनियम, 1957 (संशोधित) की धाराओं के तहत बेहट पुलिस स्टेशन, सहारनपुर ने 1 नवंबर को एक एफआईआर दर्ज की है। जांच के दौरान हिमाचल और सहारनपुर में ज्ञान चंद और उसके साथियों सहित कई खनन माफियाओं के 12 परिसरों की तलाशी ली गई और कई लोगों के बयान दर्ज किए गए। ईडी की जांच से पता चला है कि जय मां ज्वाला स्टोन क्रशर द्वारा किए अवैध खनन से अर्जित 1.80 करोड़ रुपये की नकदी का इस्तेमाल सहारनपुर की तहसील बेहट के ग्राम बरथा में गढ़वाल स्टोन क्रशर खरीदने में किया गया है। गढ़वाल स्टोन क्रशर में ज्ञान चंद, संजय धीमान के अलावा दो और लोग साझेदार हैं। चारों की भागीदारी क्रमशः 75, 9, 8-8 प्रतिशत है।