प्रदेश में गायनी के सबसे बड़े सरकारी कमला नेहरू अस्पताल में घोर लापरवाही की हद तो देखिए। सुरक्षित प्रसव कराने आई महिला के पेट में कॉटन पैड ही छोड़ दिया। नार्मल डिलीवरी के बाद जच्चा-बच्चा को डिस्चार्ज कर दिया गया। नौ दिन बाद रविवार सुबह घर पर महिला के पेट में तेज दर्द उठा तो उसे निजी अस्पताल ले जाया गया।
यहां जांच के बाद पेट में कॉटन पैड होने का खुलासा हुआ। उसे सुरक्षित निकाला गया जिसके बाद महिला की जान बच पाई। महिला के भाई रामलाल शर्मा का कहना है कि सरकारी अस्पताल की यह घोर लापरवाही है, इसकी अस्पताल प्रबंधन से शिकायत की जाएगी। देर होती तो बहन की जान भी जा सकती थी।
नार्मल डिलीवरी के बाद भेज दिया था मरीज को घर
शिमला जिले के रोहडू के रहने वाले रामलाल ने बताया कि उसकी बहन को प्रसव पीड़ा होने पर कमला नेहरू अस्पताल लाया गया। आठ मई की सुबह सामान्य प्रसव के दौरान बच्चे को जन्म दिया। सफाई के दौरान लापरवाही से कॉटन पैड छोड़ दिया गया। ड्यूटी पर तैनात डाक्टर ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया। कुछ देर बाद प्रसव कक्ष से वार्ड में शिफ्ट कर दिया। इसके बाद जच्चा-बच्चा की जांच के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
पूरा परिवार शिमला से रोहडू चला गया। कुछ दिन सब ठीक रहा, बीच बीच में पेट में दर्द होना लगा। पहले इसे सामान्य मान रहे थे, लेकिन रविवार को जब तेज दर्द हुआ तो उसे रोहडू के एक निजी अस्पताल में लाया गया। यहां जांच के बाद पता चला कि कॉटन पैड की वजह से दर्द हो रहा है। समय रहते पता चलने पर महिला की जान बच पाई।
क्या कहना है अस्पताल प्रबंधन
कमला नेहरू अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक डा. एलएस चौधरी का कहना है कि मामला उनके ध्यान में नहीं है। शिकायत मिलने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। हालांकि, इस तरह के मामले विभागाध्यक्ष ही देखती हैं। वह भी अपने स्तर पर मामले की जांच करवाएंगे।
क्या कहते हैं परिजन- महिला के भाई रामलाल शर्मा का कहना है कि वह इसकी शिकायत विभागाध्यक्ष और वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक से करेंगे। ऐसी लापरवाही प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल में कैसे हो सकती है। अगर उसकी बहन को कुछ हो जाता तो इसका जिम्मेदार कौन होता। लापरवाही करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाए।