प्रदेश में होने वाली भाषा अध्यापकों की बैचवाइज भर्ती आरएंडपी नियमों के कारण एक बार फिर विवादों में पड़ गई है। भर्ती पर भाषा अध्यापक प्रशिक्षित बेरोजगार संघ ने प्रश्नचिह्न लगाए हैं। संघ का आरोप है कि सरकार भाषा अध्यापकों की बैचवाइज भर्ती कर रही है, प्रशिक्षित बेरोजगारों के साथ धोखा है।
संघ के पदाधिकारियों में सुनीता, अनीता, सुमन, किरण, लता, उमा, वंदना, प्रतिभा, इंदु, मान सिंह, अर्जुन, रीता, मीनाक्षी, संजय, विक्रम, सूरज, अंजू, विपन, पल्लवी और रोहित ने कहा कि सरकार ने भाषा अध्यापक के आरएंडपी नियम वर्ष 2011 में बनाए थे। 31 मार्च, 2014 के बाद बीएड जरूरी कर दी गई। प्रदेश में वर्ष 2011-12 में भाषा अध्यापकों की बैचवाइज भर्ती हुई।
इसमें वर्ष 2009 तक के प्रशिक्षित अध्यापकों को बुलाया गया, लेकिन हाल ही में जारी हुई भाषा अध्यापक बैचवाइज भर्ती अधिसूचना में सिर्फ वर्ष 2000 तक बीएड के बैचवाइज कैटागिरी को बुलाया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश भर में भाषा अध्यापकों के 400 पद बैचवाइज भरे जा रहे हैं। भाषा अध्यापकों के लिए बीएड वर्ष 2014 के बाद जरूरी कर दी गई, लेकिन बैचवाइज भर्ती के लिए एलटी के लिए वर्ष 2000 तक के बीएड अध्यापकों को ही योग्य करार दिया है।
इससे पहले भाषा अध्यापकों की भर्ती बीए हिंदी या एमए हिंदी के बैच के आधार पर होती रही है। जब भाषा अध्यापकों के लिए बीएड जरूरी कर दी तो कई उम्मीदवारों ने कठिन परिस्थितियों में बीएड कर ली। अब भाषा अध्यापकों का बैच पहले की तरह बीए या हिंदी एमए के आधार पर न होकर उनके बीएड पास करने के वर्ष से निर्धारित कर दिया गया है।
इस नियम को भाषा अध्यापक अपने साथ धोखा मान रहे हैं। उन्होंने हाईकोर्ट में इसे चुनौती देने की चेतावनी दी है। उधर, निदेशक प्रारंभिक शिक्षा मनमोहन शर्मा का कहना है कि आरएंडपी नियमों के तहत 2014 के बाद भाषा अध्यापकों की भर्ती में बीएड का बैच ही मान्य है। विस्तृत जानकारी विभाग की वेबसाइट पर है।