कॉलेजों में ही मूल्यांकन करने के विवि के फैसले से शिक्षक नाराज, चेकिंग करने से इनकार
बोले, परीक्षा की गोपनीयता खतरे में पड़ जाएगी
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। स्नातक डिग्री कोर्र्स की द्वितीय वर्ष की उत्तर पुस्तिकाओं की चेकिंग करने का काम शुरू नहीं हो पाया है। राजकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ ने पेपर चेकिंग का कार्य करने से मना कर दिया है।
दरअसल हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय ने स्नातक डिग्री कोर्स की द्वितीय वर्ष की उत्तर पुस्तिकाओं का कॉलेज स्तर पर ही मूल्यांकन करने का निर्णय लिया है। फैसले के मुताबिक जिस कॉलेज में परीक्षा होगी वहीं उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन भी होगा। संघ का कहना है कि यह निर्णय सही नहीं। सात मई से स्नातक डिग्री कोर्स बीए, बीएससी, बीकॉम और शास्त्री द्वितीय वर्ष की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन कार्य कॉलेजों में शुरू होना था। विवि के परीक्षा नियंत्रक ने कॉलेज प्राचार्यों को 6 मई को इस बाबत आदेश जारी कर दिए थे। लेकिन कॉलेज शिक्षक इसके विरोध में उतर गए हैं।
राजकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ के अध्यक्ष डॉ. धर्मवीर धारवाल, वरिष्ठ उपाध्यक्ष संजय जसरोटिया और महासचिव डॉ. रामलाल शर्मा ने कहा कि यह परीक्षा की गोपनीयता के साथ खिलवाड़ है। कॉलेजों में वही शिक्षक उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करेंगे जिन्होंने छात्रों को पढ़ाया है। ऐसे में मूल्यांकनकर्ता शिक्षकों पर कई तरह के दबाव पड़ने लगे हैं। आरोप है कि विवि प्रशासन ने द्वितीय वर्ष की उत्तर पुस्तिकाओं के आंतरिक मूल्यांकन का निर्णय लेने से पूर्व मूल्यांकन करने वाले शिक्षकों से रॉय तक नहीं ली। कहा कि पहले यूजी अंतिम वर्ष की उत्तर पुस्तिकाओं का जल्द नतीजे घोषित करने की बात कहकर आंतरिक मूल्यांकन करवाया। कॉलेज शिक्षकों ने इसे पूरा किया। अब द्वितीय वर्ष का भी आंतरिक मूल्यांकन करने के आदेश दे दिए हैं। महासचिव डॉ. रामलाल शर्मा ने कहा कि कॉलेज शिक्षक आंतरिक मूल्यांकन नहीं करेंगे। यह परीक्षा व्यवस्था और गोपनीयता के साथ खिलवाड़ है। संघ पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री से इस मामले में हस्तक्षेप कर छात्रों के भविष्य तथा परीक्षा की गोपनीयता को बनाए रखने को उचित आदेश जारी करने की मांग की है।
सालों से नहीं मिला मूल्यांकन का पैसा
कॉलेज शिक्षकों को थ्योरी, प्रेक्टिकल परीक्षा मूल्यांकन और संचालन का पिछला भुगतान सालों से नहीं किया जा रहा है। कॉलेज शिक्षकों का आरोप है कि विवि की सर्वोच्च निर्णायक संस्था ईसी में 2008 के बाद कॉलेज शिक्षकों को प्रतिनिधित्व नहीं दिया है। विवि के ऑनलाइन ईआरपी सिस्टम की खामियों को दूर नहीं किया है। परीक्षा शुल्क 10 से 15 गुना बढ़ा दिया है।